वाराणसी: वाराणसी में गंगा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जलस्तर में लगातार हो रही तेजी से वृद्धि के कारण तटीय इलाकों के लोग दहशत में हैं। शहर के सभी 84 घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और मंदिरों से लेकर प्रमुख घाटों तक सब कुछ जलसमाधि ले चुका है। अब बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों और गलियों में प्रवेश कर रहा है। यदि जलस्तर के बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो आगामी 24 घंटे बेहद संवेदनशील साबित हो सकते हैं और नदी खतरे के निशान को पार कर सकती है।
नाविकों और स्थानीय लोगों की बढ़ीं मुश्किलें
स्थानीय निवासियों और नाविकों के अनुसार, पिछले दो दिनों के भीतर जलस्तर में लगभग 10 फीट की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते नौका संचालन पूरी तरह प्रभावित हुआ है और नाविकों को रात-दिन अपनी नौकाओं की सुरक्षा और उन्हें बार-बार नए स्थानों पर बांधने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। घाटों पर बैठने वाले पुरोहित अपनी चौकियों को समेटकर सुरक्षित गलियों में ले जाने को मजबूर हैं, वहीं छोटे दुकानदारों का रोजगार भी पानी में डूब गया है।
राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर लोग
तटवर्ती बस्तियों के मकानों में बाढ़ का पानी घुस जाने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रभावित परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
प्रशासन की तैयारियाँ और एहतियाती कदम
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विस्थापित लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था के लिए 40 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
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निगरानी और त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए 21 बाढ़ चौकियाँ सक्रिय की गई हैं।
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एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस की टीमों को 24 घंटे तैनात रखा गया है।
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श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को चेतावनी जारी करते हुए गहरे पानी और उफनते घाटों के समीप जाने से सख्त मना किया गया है।

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