August 20, 2026

पेंशनरों के लिए बड़ी खुशखबरी, 70 वर्ष बाद मिलेगा 5% अतिरिक्त पेंशन भत्ता

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'राजस्थान पेंशनर समाज' द्वारा आयोजित सम्मान एवं आभार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पेंशनर्स का प्रशासनिक अनुभव और निर्णय लेने का कौशल 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारियों से कभी नहीं। मुख्यमंत्री ने पेंशनरों से अपने अनुभवों को युवा पीढ़ी के साथ साझा करने का आह्वान किया।

विकास की नींव में पेंशनर समाज का योगदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान आज विकास के जिस पायदान पर है, उसकी नींव में पूर्व कर्मचारियों का परिश्रम और दूरदर्शिता शामिल है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, पुलिस और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पेंशनर्स के योगदान की अमिट छाप है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

पेंशनरों के हित में लिए गए प्रमुख फैसले

राज्य सरकार द्वारा पेंशनर्स के कल्याण, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं:

  • वित्तीय लाभ में बढ़ोतरी: ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया है।

  • वेतन वृद्धि का लाभ: 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को 1 जुलाई की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) देने का प्रावधान किया गया है।

  • अतिरिक्त पेंशन भत्ता: 70 वर्ष की आयु पूरी करने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन भत्ता दिया जा रहा है, जिसे न्यायिक सेवा के पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनरों पर भी लागू किया गया है।

  • पारिवारिक पेंशन नियम: कर्मचारी के असामयिक निधन पर 10 वर्ष तक बढ़ी हुई दरों पर पारिवारिक पेंशन देने का नियम बनाया गया है। साथ ही विशेष योग्यजन भाई-बहन को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है।

डिजिटल प्रक्रिया और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल हस्ताक्षर से PPO, GPO एवं CPO जारी करने की सुविधा शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त, सरकारी अधिकारी अपनी SSO ID के माध्यम से पेंशनरों का जीवन प्रमाण-पत्र जारी कर सकते हैं, जिससे अब तक 5 लाख से अधिक पेंशनर घर बैठे इसका लाभ उठा चुके हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत राज्य सरकार के पेंशनरों के लिए आउटडोर (OPD) चिकित्सा सुविधा की वार्षिक सीमा ₹30 हजार से बढ़ाकर ₹50 हजार कर दी गई है। वहीं, बोर्ड, निगम, स्वायत्तशासी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के पेंशनरों के लिए इस सीमा को ₹20 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिवर्ष कर दिया गया है।