August 20, 2026

क्या फडणवीस बन गए ‘सुपर CM’? नए नियमों पर महाराष्ट्र सरकार ने दी सफाई

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को नए ‘रूल्स ऑफ बिजनेस’ के तहत मंत्रियों के फैसलों को पलटने या रद्द करने की ‘वीटो पावर’ दिए जाने की खबरों पर राज्य सरकार ने स्थिति साफ की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के फैसलों को बदलने का अधिकार कोई नया प्रावधान नहीं है, बल्कि यह शक्ति 1975 से लागू नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास पहले से ही मौजूद है। संविधान के अनुसार मंत्रियों को मिलने वाली प्रशासनिक शक्तियां मूल रूप से मुख्यमंत्री में ही निहित होती हैं, जिन्हें वे विभागों के आवंटन के दौरान मंत्रियों को सौंपते हैं।

अर्ध-न्यायिक मामलों में मंत्रियों का निर्णय ही अंतिम

सरकार ने स्पष्ट किया कि सामान्य प्रशासनिक मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, लेकिन अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) मामलों में स्थिति अलग है। ऐसे मामलों में संबंधित मंत्री द्वारा लिया गया फैसला स्वतंत्र और अंतिम माना जाता है। इन अर्ध-न्यायिक निर्णयों के खिलाफ सरकार के भीतर अपील का कोई प्रावधान नहीं होता और प्रभावित पक्ष केवल हाई कोर्ट का रुख कर सकता है।

उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में शुरू हुई थी प्रक्रिया

'रूल्स ऑफ बिजनेस' में बदलाव की यह प्रक्रिया काफी पुरानी है। अक्टूबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसके लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया था। इसके बाद जुलाई 2021 में संशोधित अध्ययन समूह बनाया गया, जिसने फरवरी 2022 में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे को सौंपी। इसके बाद एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री रहते यह रिपोर्ट कैबिनेट में आई और जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व उपमुख्‍यमंत्रियों के समक्ष प्रस्तुति के बाद मंत्रिमंडल ने इसे अंतिम मंजूरी दी।

1975 के बाद पहली बार व्यापक प्रशासनिक सुधार

महाराष्ट्र में 1975 से लागू नियमों में इससे पहले 1990 में मामूली संशोधन हुए थे, लेकिन इस बार केंद्र और अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन कर व्यापक स्तर पर सुधार किया गया है। नए प्रारूप में नियमों की संख्या 15 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है और शेड्यूल की संख्या दो से बढ़ाकर चार कर दी गई है। नियम 10 के तहत तीसरी अनुसूची के 34 विषयों को अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा, जबकि नियम 11 के तहत चौथी अनुसूची के मामलों को मुख्यमंत्री के जरिए राज्यपाल को भेजा जाएगा।