मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखने को मिला। सुबह 11:25 बजे बीएसई सेंसेक्स 0.52% यानी 510 अंकों की भारी गिरावट के साथ 77,509 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 0.52% यानी 127 अंक फिसलकर 24,238 पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट का असर बाजार के कुल मूल्यांकन पर भी पड़ा, जिससे बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब 79,000 करोड़ रुपये घट गया। बाजार में सबसे ज्यादा बिकवाली IT शेयरों में देखने को मिली, जहां इंफोसिस (Infosys), एचसीएल टेक (HCL Tech), टीसीएस (TCS) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) जैसे दिग्गज शेयर दबाव में रहे।
बाजार पर हावी घरेलू और वैश्विक कारक
इस समय भारतीय शेयर बाजार की चाल पर कई बड़े घरेलू और वैश्विक ट्रिगर असर डाल रहे हैं। निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर बनी हुई है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, आने वाले दिनों में निवेशकों की मुख्य नजर कच्चे तेल के दाम, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी खुदरा बिक्री के आंकड़े, FOMC मिनट्स और चीन के आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेगी।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की तेजी दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की आवाजाही का धीमा होना और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों का कमजोर पड़ना है।
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ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 60 सेंट यानी 0.7% बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
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अमेरिकी WTI क्रूड भी 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
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पिछले हफ्ते दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 5% से अधिक की तेजी आई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगा कच्चा तेल भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की लागत में इजाफा होता है।
IT शेयरों में सबसे भारी बिकवाली
सोमवार के कारोबार में IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव झेल रहा है। Infosys, HCL Tech, TCS और Tech Mahindra जैसे प्रमुख शेयरों में 3% तक की गिरावट आई। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स बुधवार को जारी होने वाले हैं, जिससे यह संकेत मिलेगा कि ब्याज दरों में कटौती को लेकर फेड का अगला कदम क्या होगा।
यदि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ती हैं, तो अमेरिका और यूरोप की कंपनियां अपने टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती कर सकती हैं, जिसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों के नए ऑर्डर्स और मुनाफे पर पड़ सकता है।
विदेशी (FII) और घरेलू (DII) निवेशकों का रुख
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले हफ्ते शुक्रवार को भारतीय बाजार में 508 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। पूरे पिछले सप्ताह के दौरान FII ने कुल 1,228.24 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार में लगातार मजबूत खरीदार बने हुए हैं, और पिछले हफ्ते DII ने कुल 9,285.63 करोड़ रुपये की शानदार खरीदारी की है।
बाजार को लेकर एक्सपर्ट्स की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे के बीच ही झूल सकता है। इस दायरे को तोड़ने के लिए किसी बड़े ट्रिगर की आवश्यकता होगी। कच्चे तेल के 89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचना और भू-राजनीतिक संकट का तुरंत समाधान न दिखना बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा रहा है। उन्होंने सलाह दी है कि निवेशकों को केवल निफ्टी-50 तक सीमित रहने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी फोकस करना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचनार्थ है और इसे किसी भी तरह की निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। अपना पैसा निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)

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