काठमांडू/नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वहां नई सरकार के गठन के बाद नेपाली गोरखाओं की भारतीय सेना में भर्ती का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब चार वर्षों से अटके इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों देशों के बीच नए सिरे से संवाद शुरू होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
मानद 'जनरल' की उपाधि से होंगे सम्मानित
नेपाल की ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को मानद 'जनरल' की उपाधि से सम्मानित करेंगे। दोनों पड़ोसी देशों के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद जनरल का पद प्रदान करने की यह अनूठी परंपरा साल 1950 से निरंतर चली आ रही है।
अग्निपथ योजना और गोरखा भर्ती का विवाद
भारत में साल 2022 में 'अग्निपथ योजना' लागू होने के बाद नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों की भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पर रोक लगा दी थी। नेपाल का मानना था कि नया भर्ती ढांचा भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के अनुकूल नहीं है। इसके चलते नेपाल स्थित दो भारतीय भर्ती केंद्रों पर काम ठप हो गया था। हालांकि, पूर्व नेपाली गोरखा सैनिक लंबे समय से नेपाली युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत भर्ती करने की मांग उठा रहे हैं।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम और उद्देश्य
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का मुख्य ध्येय भारत-नेपाल रक्षा संबंधों को अधिक सुदृढ़ बनाना और सैन्य समन्वय को बढ़ावा देना है।
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18 अगस्त: जनरल सेठ शिवपुरी स्थित 'आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज' के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करेंगे और विदेशी सैन्य अधिकारियों से संवाद करेंगे।
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19 अगस्त: वे पोखरा में आयोजित 'पूर्व सैनिक रैली' में शिरकत करेंगे और भारतीय सेना के पूर्व गोरखा सैनिकों से मुलाकात कर उसी दिन स्वदेश लौटेंगे।
नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुई इस उच्चस्तरीय सैन्य यात्रा से ठप पड़ी गोरखा भर्ती प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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