August 15, 2026

वकीलों से बदसलूकी का आरोप, कड़कड़डूमा कोर्ट में पुलिसकर्मियों के प्रवेश पर रो

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली स्थित कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति गंभीर हो गई है। शाहदरा बार एसोसिएशन ने एक कड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली पुलिस के जवानों और अधिकारियों के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में प्रवेश करने पर आगामी आदेश तक पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और शाहदरा जिले की पुलिस लगातार अधिवक्ताओं के साथ बदसलूकी, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार कर रही है। एसोसिएशन का कहना है कि वकीलों के आत्मसम्मान और पेशेवर अधिकारों की रक्षा के लिए यह प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो गया था।

आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें व्यापक चर्चा के बाद यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया। इसके तहत अब अगले आदेश तक तीनों जिलों (पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और शाहदरा) के किसी भी पुलिसकर्मी या अधिकारी का कोर्ट परिसर के अंदर दाखिल होना पूरी तरह वर्जित रहेगा।

वरिष्ठ अधिकारियों पर दोषी पुलिसकर्मियों को शह देने का आरोप

बार एसोसिएशन का दावा है कि वकीलों द्वारा पुलिसिया ज्यादती की जो शिकायतें दी जा रही हैं, उन पर वरिष्ठ अधिकारी कोई सख्त कार्रवाई करने के बजाय उलटा दोषी कर्मियों का बचाव कर रहे हैं। शाहदरा बार एसोसिएशन के सचिव नरवीर डबास के अनुसार, हाल ही में जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी के इशारे पर दो वकीलों को ट्रैफिक नियमों के बहाने लगभग 45 मिनट तक पुलिस की जिप्सी में बंधक बनाकर रखा गया।

आरोप है कि कृष्णा नगर के इंस्पेक्टर और गांधी नगर के एसीपी ने वकीलों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए। इसके अलावा, पूर्वी जिले के डीसीपी पर भी गंभीर आरोप है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं की और उन्हें बचाने का प्रयास किया।

वकीलों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील

विवाद बढ़ने के बाद शाहदरा बार एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्य अधिवक्ताओं से संयम, शांति और एकजुटता बनाए रखने का आग्रह किया है। साथ ही यह निर्देश भी जारी किया गया है कि यदि भविष्य में किसी भी वकील के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार की कोई घटना होती है, तो वे तुरंत पुख्ता सबूतों के साथ कार्यकारी समिति को अवगत कराएं, ताकि सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकें।