रायपुर : ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर स्थायी आजीविका के साधनों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित विकसित भारत जी-राम जी आजीविका डबरी मिशन का लाभ अब ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। सरगुजा जिले के विकासखंड अम्बिकापुर की ग्राम पंचायत परसा निवासी बरातु सिंह पोया के लिए योजना के तहत निर्मित डबरी अब उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनने जा रही है। लगभग 35 मीटर × 35 मीटर क्षेत्रफल में निर्मित इस डबरी में मत्स्य पालन की शुरुआत हो चुकी है।
डबरी निर्माण पूर्ण होने के बाद मत्स्य विभाग द्वारा बरातु सिंह को फिंगरलिंग मछली बीज उपलब्ध कराया गया। अब वे डबरी में मछली पालन कर अपनी आजीविका को मजबूत करने के साथ परिवार की आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जल संसाधन को आजीविका गतिविधि से जोड़ने से उन्हें अपनी उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला है।
डबरी बनी आय का नया साधन
बरातु सिंह पोया ने बताया कि योजना के तहत उनकी जमीन पर डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी तैयार होने के बाद मत्स्य विभाग से मछली बीज भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि वे मछलियों का बेहतर तरीके से पालन करेंगे, जिससे आने वाले समय में मछली उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इससे परिवार की दैनिक जरूरतों और अन्य खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी तथा आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
उन्होंने योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की ऐसी पहल ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने अपने गांव के अन्य ग्रामीणों को भी योजना की जानकारी देने और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आजीविका के नए साधन विकसित करने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
मत्स्य पालन से बढ़ेगी अतिरिक्त आमदनी
डबरी में मत्स्य पालन शुरू होने से पोया को आने वाले समय में मछली उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ जीवन स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
जल संरचनाओं का आजीविका से हो रहा अभिसरण
वीबी-जी राम जी आजीविका डबरी मिशन के तहत निर्मित जल संरचनाओं को मत्स्य पालन जैसी आयमूलक गतिविधियों से जोड़ना ग्रामीण विकास की दिशा में प्रभावी पहल है। डबरी निर्माण और मत्स्य विभाग के सहयोग से मछली बीज उपलब्ध कराने से ग्रामीण परिवारों को कृषि एवं अन्य पारंपरिक गतिविधियों के साथ अतिरिक्त आय के साधन विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
इस तरह योजना के माध्यम से निर्मित डबरियां केवल जल संरक्षण और ग्रामीण परिसंपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि आजीविका, आय संवर्धन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं। बरातु सिंह की पहल इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से ग्रामीण परिवार अपने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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