August 13, 2026

कुसुमेश्वर महादेव मंदिर में दिखा विशाल कोबरा, मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

उज्जैन: पवित्र सावन मास के चलते इन दिनों शहर के तमाम शिवालयों और देवालयों में शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है। इसी बीच, हरियाली अमावस्या की रात उज्जैन के राम जनार्दन मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले 38वें 84 महादेव 'कुसुमेश्वर महादेव मंदिर' से एक हैरान करने वाली घटना प्रकाश में आई है। यहां रात की नियमित आरती संपन्न होने के ठीक बाद अचानक भगवान शिव के विग्रह के समीप एक खतरनाक जहरीला कोबरा सांप रेंगता हुआ नजर आया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से मंदिर परिसर और आसपास के लोगों में कुछ पलों के लिए चिंता और कौतूहल का माहौल बन गया। हालांकि, मंदिर के मुख्य पुजारी गौरव विश्वनाथ मिश्रा ने तत्परता दिखाते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय सर्प विशेषज्ञ से संपर्क किया, जिसके बाद सांप को सुरक्षित बाहर निकालकर जंगल में छोड़ दिया गया।

आरती के बाद हवन कुंड के पास फन फैलाए बैठा था कोबरा

यह पूरी घटना हरियाली अमावस्या की रात करीब साढ़े आठ बजे की है। मंदिर में नियमानुसार संध्या आरती का आयोजन किया गया था। आरती समाप्त होने के बाद अधिकांश श्रद्धालु अपने घरों को लौट चुके थे। मंदिर के पुजारी पंडित गौरव विश्वनाथ मिश्रा गर्भगृह के पास बैठकर अपने मोबाइल फोन पर कुछ आवश्यक कार्य कर रहे थे, तभी अचानक उनकी नजर हवन कुंड के पास पड़ी।

उन्होंने देखा कि एक विशाल कोबरा अपना फन फैलाए वहां बैठा हुआ है। इतने जहरीले सांप को इतनी नजदीक देखकर पंडित जी के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत ध्यान दिया कि उस वक्त मंदिर का मुख्य दरवाजा और अलमारियां खुली हुई थीं। ऐसे में यदि थोड़ी भी देर होती, तो वह कोबरा मंदिर के भीतरी हिस्सों या किसी अलमारी में छिप सकता था, जिससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।

सर्पमित्र की सूझबूझ से टला बड़ा खतरा, सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुजारी गौरव मिश्रा ने किसी प्रकार का जोखिम उठाने के बजाय तुरंत पेशेवर मदद लेने का निर्णय लिया। उन्होंने मोबाइल के जरिए इंस्टाग्राम पर खोजबीन कर उज्जैन के जाने-माने सर्पमित्र राहुल का संपर्क सूत्र प्राप्त किया। नंबर मिलते ही उन्होंने राहुल को फोन कर मंदिर परिसर में कोबरा होने की सूचना दी और जल्द से जल्द पहुंचने का आग्रह किया।

सूचना मिलते ही सर्पमित्र राहुल अपनी रेस्क्यू टीम के साथ तुरंत कुसुमेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे। उन्होंने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ कोबरा को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर डिब्बे में बंद कर लिया। इसके बाद इस जहरीले सांप को मंदिर परिसर से दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास यानी घने जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया।

मंदिर के इतिहास में पहली बार हुई ऐसी दुर्लभ घटना

इस अनोखी घटना के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी पंडित गौरव ने बताया कि इस प्राचीन और पौराणिक मंदिर परिसर में गर्भगृह या शिवलिंग के इतने करीब सांप दिखाई देने की यह अपनी तरह की पहली घटना है। हालांकि, मंदिर के आसपास का पूरा इलाका काफी हरा-भरा और प्राकृतिक वनस्पतियों से परिपूर्ण है, जिसके कारण इस क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीवों और सांपों का आना-जाना सामान्य बात है। लेकिन मंदिर के भीतर कोबरा का इस तरह से प्रकट होना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह घटना घटी, उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ नहीं थी, जिससे किसी भी तरह की अनहोनी की आशंका टल गई।

मानसून के मौसम में बिलों से बाहर आ रहे हैं विषैले जीव

इस सफल रेस्क्यू को अंजाम देने वाले सर्पमित्र राहुल ने इस संबंध में बताया कि सावन के इस मौसम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जलभराव के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाता है, जिससे मजबूरन सांपों को अपने भूमिगत बिलों से बाहर निकलना पड़ता है। राहुल ने जानकारी दी कि इस साल सावन माह के दौरान अकेले उज्जैन जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से अब तक 200 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है, जिन्हें आबादी से दूर सुरक्षित जंगलों में प्राकृतिक माहौल में छोड़ा गया है।