August 12, 2026

AI की रेस में चीन की बढ़त से डरे जकरबर्ग, अमेरिका को लेकर क्यों जताई चिंता?

नई दिल्ली।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा अब केवल तकनीकी और सॉफ्टवेयर की दुनिया तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन और सुपरपावर की स्थिति निर्धारित करने वाला सबसे बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने ऊर्जा उत्पादन और डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे को विकसित करने की रफ्तार में तेजी नहीं दिखाई, तो चीन इस वैश्विक दौड़ में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है। उनके अनुसार, एडवांस AI को तेजी से विकसित करने वाले देशों का भविष्य के भू-राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिसका सीधा असर आर्थिक समृद्धि, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ना तय है।

 चीन की बढ़ती ऊर्जा क्षमता और अमेरिका की चिंताएं

मार्क जकरबर्ग का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर स्थापित करने के लिए केवल अत्याधुनिक चिप्स या सॉफ्टवेयर होना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए विशाल मात्रा में बिजली और मजबूत भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी आवश्यकता होती है। इसी मोर्चे पर चीन की तेज कार्यशैली अमेरिका के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि सिलिकॉन डिजाइन के मामले में अमेरिका को बढ़त जरूर हासिल है, लेकिन ऊर्जा क्षमता और डेटा सेंटर निर्माण की गति के मामले में वह पिछड़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि चीन जैसी महाशक्तियां हर दूसरे हफ्ते एक गीगावॉट से अधिक परमाणु ऊर्जा क्षमता को ऑनलाइन ला रही हैं, जिसके मुकाबले अमेरिका को अपनी ऊर्जा और ढांचागत विकास की गति को कई गुना बढ़ाना होगा।

तकनीकी रेसमें महीनों की बढ़त भी है निर्णायक

मेटा प्रमुख ने मौजूदा AI उद्योग को इतिहास के सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में से एक करार दिया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में कोई भी तकनीकी उपलब्धि या नया आविष्कार लंबे समय तक किसी एक देश या कंपनी के पास सुरक्षित नहीं रहता है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी देश बहुत कम समय में नए इनोवेशन को अपना लेते हैं। यही कारण है कि इस महादौड़ में यदि किसी देश को दो महीने की भी बढ़त मिलती है, तो वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। तकनीक के इस मैदान में बढ़त को लगातार बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा की रफ्तार बेहद तीव्र है।

 अमेरिकी निर्यात नियंत्रण का समर्थन और घरेलू नीतियों पर जोर

मार्क जकरबर्ग ने अत्याधुनिक चिप्स के निर्यात पर अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए नियंत्रणों का पुरजोर समर्थन किया है, जिससे विदेशी स्तर पर AI के विकास की गति को कुछ समय के लिए धीमा करने में मदद मिली है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिका को ऐसी किसी भी घरेलू नीति से बचना चाहिए जो उसकी अपनी तकनीकी क्षमताओं को कमजोर करे। उनके अनुसार, अमेरिकी AI मॉडलों के लॉन्च में एक महीने की देरी भी देश के नेतृत्व को जोखिम में डाल सकती है और विदेशी मॉडलों को आगे बढ़ने का खुला मौका दे सकती है।

 सरकार और टेक कंपनियों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बात करते हुए जकरबर्ग ने अमेरिकी सरकार और बड़ी तकनीकी कंपनियों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को और अधिक मजबूत करने की वकालत की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि अमेरिका को ओपन-सोर्स AI के क्षेत्र में अपनी बादशाहत कायम रखनी चाहिए ताकि दुनिया के सबसे बेहतरीन ओपन-सोर्स मॉडल अमेरिका की धरती से ही दुनिया के सामने आ सकें। संक्षेप में कहें तो भविष्य की यह जंग केवल बेहतर सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रचुर ऊर्जा, डेटा सेंटर और रणनीतिक बढ़त हासिल करने की एक बड़ी भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बन चुकी है।