नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुधवार को यह स्पष्ट किया गया कि सरकार प्रत्येक विषय पर सदन के भीतर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तत्पर है, बशर्ते विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित होने दे। गृह मंत्री ने कहा कि आज दोपहर तीन बजे से चर्चा की शुरुआत की जा सकती है और वह स्वयं सदन में उपस्थित रहकर सभी पक्षों की बातें सुनेंगे तथा कल दोपहर तीन बजे तक सभी उठाए गए प्रश्नों के उत्तर देंगे। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को केंद्रीय गृह मंत्री का भाषण सुनने में कोई रुचि नहीं है, बल्कि सरकार को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि राजधानी में प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित रूप से गोलियां और लाठीचार्ज किसके आदेश पर हुआ।
संसद की कार्यवाही और चर्चा पर गृह मंत्री का पक्ष
पिछले लगभग बीस दिनों से संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—की कार्यवाही लगातार बाधित चल रही है। विपक्ष इस बात पर अड़ा हुआ है कि छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कथित ज्यादतियों के मुद्दे पर गृह मंत्री सदन में अपना बयान दें और जवाब दें। इस गतिरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष खुद ही संसद के दोनों सदनों को चलने नहीं दे रहा है, और जब विपक्ष की वजह से कार्यवाही लगातार स्थगित हो रही है, तो ऐसी स्थिति में सदन के भीतर जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, और अब यह निर्णय देश की जनता को करना चाहिए कि वास्तव में सदन की कार्यवाही से कौन भाग रहा है।
सरकार का रुख और हर सवाल का जवाब देने की प्रतिबद्धता
गृह मंत्री ने विश्वास दिलाया कि सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है और आज दोपहर तीन बजे से लेकर कल दोपहर तीन बजे तक की समयावधि के दौरान सरकार हर पहलू पर खुली चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि वह सदन में न केवल इस मुख्य मुद्दे पर बहस के लिए मौजूद रहेंगे, बल्कि इस बात पर भी व्यापक चर्चा करेंगे कि आखिरकार विपक्ष किन कारणों से सदन के भीतर चर्चा होने से रोकना चाहता है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के तीखे सवाल
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं और उन्हें कीलों वाली लाठियों से पीटने के निर्देश किसने दिए थे, इसका जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि क्या देश के बच्चों पर गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री द्वारा दिया गया था, और यदि ऐसा है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री पिछले बीस दिनों से सदन से नदारद रहे हैं और उनमें इस मुद्दे का सामना करने का साहस नहीं है।

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