August 12, 2026

मिस वर्ल्ड 2026 में भारत की कमान निकिता पोरवाल के हाथ, प्रियंका चोपड़ा से मिली प्रेरणा

सौंदर्य प्रतियोगिता 'मिस वर्ल्ड' का मंच जितना बाहर से चमकदार और आकर्षक नजर आता है, वहां तक पहुंचने का सफर उतना ही कठिन और अनुशासन से भरा होता है। इसके पीछे महीनों की कड़ी मेहनत, कठिन रूटीन और खुद को लगातार बेहतर बनाने की चुनौती छिपी होती है। फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2024 का खिताब जीतने वाली उज्जैन की बेटी निकिता पोरवाल इन दिनों वियतनाम में होने वाले मुख्य मुकाबले के लिए इसी कड़े प्रशिक्षण में पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं।

कभी सुबह जल्दी उठने से कतराने वाली निकिता आज अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए रात के दो बजे ही मेकअप शुरू कर देती हैं और सुबह चार बजे तक पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। उनका कहना है कि एक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने की बड़ी जिम्मेदारी ने उनकी पूरी दिनचर्या और जीवनशैली को ही बदल कर रख दिया है।

'ताज सिर पर सजा, लेकिन सामने सिर्फ तिरंगा था'

निकिता के लिए फेमिना मिस इंडिया का ताज पहनना किसी व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बढ़कर था। अपने उस अनुभव को साझा करते हुए वह बताती हैं, 'यह बेहद खुशी का पल था, क्योंकि मेरा हमेशा से यह सपना था कि मैं अपने जीवन में कुछ ऐसा करूं जिससे मुझे देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव मिल सके। जब वह ताज मेरे सिर पर सजा, तो मेरे मन में सबसे पहला ख्याल यही आया कि अब मुझे अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिस वर्ल्ड के रूप में भारत को रिप्रेजेंट करने का अवसर मिलेगा। ताज जीतने की अपनी खुशी थी, लेकिन उससे भी बड़ा यह अहसास था कि अब मैं दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपने देश का नाम लेकर खड़ी होऊंगी।'

'लोग सिर्फ रैंप देखते हैं, पीछे का कड़ा अनुशासन नहीं'

मिस वर्ल्ड की तैयारियों के बारे में बात करते हुए निकिता बताती हैं कि इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन हिस्सा निरंतरता (Consistency) बनाए रखना है। वह कहती हैं, 'कोई एक जादुई चीज नहीं होती। सफलता पूरी तरह से इस बात पर टिकी होती है कि आप हर दिन बिना थके वही रूटीन, वही मेहनत और वही समर्पण दिखाएं। एक-दो दिन नहीं, बल्कि महीनों तक ऐसा करना पड़ता है। लोग बाहर से केवल खूबसूरत गाउन और रैंप वॉक देखते हैं, लेकिन उसके पीछे के महीनों के संघर्ष और अनुशासन को बहुत कम लोग समझ पाते हैं।'

'बदला हुआ रूटीन और देश के लिए जज्बा'

अपने जीवन में आए बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए निकिता मानती हैं कि पिछले एक साल में उनके अंदर सबसे बड़ा बदलाव अनुशासन के मामले में आया है। 'मुझे पहले सुबह जल्दी उठने में बहुत परेशानी होती थी, मैं बिल्कुल भी मॉर्निंग पर्सन नहीं थी। लेकिन मिस इंडिया बनने के बाद यह अहसास हुआ कि जब आप देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, तब आपकी व्यक्तिगत सुविधाएं कोई मायने नहीं रखतीं। आज हालात ये हैं कि कई बार रात के दो बजे मेकअप शुरू करना पड़ता है और सुबह चार बजे तक पूरी तरह तैयार रहना होता है। यह सब मैं बहुत खुशी के साथ करती हूं, क्योंकि अब यह सिर्फ मेरा व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि मेरे देश का सम्मान है।'

'रैंप वॉक के साथ किताबों से भी है गहरा नाता'

निकिता का मानना है कि मिस वर्ल्ड की तैयारी केवल अच्छी चाल-ढाल और फिटनेस तक सीमित नहीं होती है। उनका पूरा दिन अलग-अलग प्रकार की ट्रेनिंग में गुजरता है, जिसमें कम्यूनिकेशन स्किल्स, हेयर-मेकअप प्रैक्टिस के साथ-साथ दुनिया भर के समसामयिक विषयों पर व्यापक अध्ययन करना शामिल होता है। एक बेहतरीन प्रतिनिधि केवल सुंदर नहीं दिखती, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश की संस्कृति, बौद्धिकता और सोच को भी बखूबी प्रदर्शित करती है।

'मां बनीं मेरी सबसे बड़ी ताकत'

अपने इस सफर को याद करते हुए वह बताती हैं कि कई बार ऐसा समय भी आया जब उन्हें खुद पर संदेह होने लगा था। फेमिना मिस इंडिया के 60 साल के इतिहास में मध्य प्रदेश से पहली राष्ट्रीय विजेता बनने के उस सफर में कई बार मन में शंकाएं आती थीं। ऐसे मुश्किल पलों में उनकी मां उनके आत्मविश्वास की सबसे बड़ी ढाल बनकर खड़ी रहीं। निकिता अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देती हैं, जिन्होंने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।

'प्रियंका और ऐश्वर्या से मिलती है प्रेरणा'

अपने आदर्शों के बारे में बात करते हुए निकिता बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियों का नाम लेती हैं। वह प्रियंका चोपड़ा की कभी न रुकने वाली जिद और उनके ग्लोबल सफर से बेहद प्रेरित हैं, वहीं ऐश्वर्या राय बच्चन के बारे में उनका कहना है कि दुनिया के किसी भी कोने में जाने के बावजूद अपनी संस्कृति और जड़ों से किस तरह जुड़े रहना है, यह ऐश्वर्या से बेहतर कोई नहीं सिखा सकता।

'अभिनय है मेरा पुराना सपना'

सौंदर्य प्रतियोगिता के बाद अपने भविष्य के प्लान पर बात करते हुए निकिता ने स्पष्ट किया कि एक्टिंग हमेशा से उनका पहला प्यार और सपना रहा है। उन्होंने परफॉर्मिंग आर्ट्स में पढ़ाई की है और थिएटर से उनका पुराना नाता है। अगर उन्हें भविष्य में एक अच्छी फिल्म या भूमिका का अवसर मिलता है, तो वह जरूर अभिनय की दुनिया में काम करना चाहेंगी और कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने अभिनेता किच्चा सुदीप के साथ स्क्रीन शेयर करने की इच्छा रखती हैं।

'माटी' प्रोजेक्ट के जरिए महिलाओं के जीवन में लाना चाहती हैं बदलाव

वियतनाम में होने वाले इस प्रतिष्ठित मुकाबले में निकिता अपने विशेष सामाजिक प्रोजेक्ट 'माटी' के साथ उतर रही हैं। देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की यात्राओं से प्रेरित होकर शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य वहां की महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक अवसर दिलाना है, ताकि वे अपनी संस्कृति को बचाए रखते हुए आत्मनिर्भर बन सकें।