August 12, 2026

खनिज संपदा के मुद्दे पर गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, बोले- केंद्र कर सकता है कब्जा

जयपुर। केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए जा रहे माइंस एंड मिनरल्स (डवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस नए संशोधन प्रस्ताव के जरिए खनिज संपदा वाले राज्यों की खानों और खनिज बहुल जमीनों पर केंद्र का नियामक नियंत्रण बढ़ाने की तैयारी है, जिस पर अब तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

खनिज राजस्व और वित्तीय अधिकारों पर केंद्र का बढ़ेगा नियंत्रण

प्रस्तावित एमएमडीआर संशोधन विधेयक के माध्यम से राज्यों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों की रूपरेखा प्रभावित हो सकती है। मौजूदा व्यवस्था में राज्यों के पास खनिज संपदा और खनन क्षेत्रों से राजस्व जुटाने के विभिन्न अधिकार हैं, लेकिन नए प्रावधानों के लागू होने पर टैक्स, रॉयल्टी और सेस जैसी लेवी तय करने की शक्ति मुख्य रूप से केंद्र के दायरे में आ जाएगी। इस बदलाव से खनिज बहुल राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।

अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार को दी चेतावनी

इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य की भजनलाल सरकार को कड़े शब्दों में आगाह किया है। उन्होंने चिंता जताई कि देश के जिन राज्यों में खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, उनके अधिकारों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। राजस्थान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में हजारों खदानों से बड़ा राजस्व और लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, ऐसे में इस बिल के प्रावधानों पर राज्य सरकार को तत्काल अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस संशोधन के जरिए राज्यों के पुराने बकाये करों को वसूलने के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं।