August 11, 2026

RTE भुगतान समेत कई मांगों पर नाराजगी, निजी स्कूल संचालकों ने दी विधानसभा घेराव की चेतावनी

जयपुर: राजस्थान में निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों और राज्य सरकार के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। अपनी विभिन्न लंबित और महत्वपूर्ण मांगों को लेकर निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। 'स्कूल शिक्षा परिवार राजस्थान' संगठन के बैनर तले संचालकों ने मुख्यमंत्री के नाम स्थानीय विधायकों को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी 21 अगस्त 2026 को राजधानी जयपुर में विधानसभा का घेराव किया जाएगा और अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत कर दी जाएगी।

निजी स्कूलों पर मनमाने आदेश और अनावश्यक जांच का आरोप

संगठन का मुख्य आरोप है कि शिक्षा विभाग की तरफ से लगातार ऐसे मनमाने निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे निजी विद्यालयों का सुचारू संचालन मुश्किल होता जा रहा है। स्कूलों में बार-बार बेवजह की जांच कराई जा रही है, जिसके कारण शिक्षण कार्य के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। संचालकों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से केवल कोरे आश्वासन ही मिल रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस स्थिति के चलते प्रदेशभर के निजी विद्यालयों के प्रबंधन और वहां कार्यरत कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान पर भी संकट मंडराने लगा है।

आरटीई भुगतान में देरी और संगठन की प्रमुख मांगें

निजी विद्यालय संचालकों ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत मिलने वाले पुनर्भरण भुगतान में हो रही लगातार देरी को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने मांग उठाई है कि निजी स्कूलों में की जाने वाली सभी प्रकार की अनावश्यक जांचों पर फौरन रोक लगाई जाए और भविष्य में किसी भी प्रकार की जांच शुरू करने से पहले संगठन या विद्यालय प्रबंधकों को भरोसे में लिया जाए। इसके साथ ही, आरटीई का लंबित भुगतान डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से समय पर सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई है, और भुगतान प्रक्रिया में बेवजह देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है।