August 12, 2026

2027 चुनाव की तैयारी में अमृतपाल, इंदिरा गांधी हत्याकांड से जुड़े परिवार को टिकट

अमृतसर। आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। इसी क्रम में जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद तथा सिख कट्टरपंथी नेता अमृतपाल सिंह के संगठन 'वारिस पंजाब दे' (अकाली दल – वारिस पंजाब दे) ने चुनावी समर में उतरने का औपचारिक बिगुल फूंक दिया है। पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने पहले उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है, जिसे पंजाब की पंथिक राजनीति में एक बड़ा और रणनीतिक दांव माना जा रहा है।

बस्सी पठाना सीट से सतवंत सिंह होंगे पहले उम्मीदवार

पार्टी द्वारा घोषित किए गए इस पहले प्रत्याशी के तहत, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में सजा पाने वाले केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को मैदान में उतारा गया है। करीब 61 वर्षीय सतवंत सिंह फतेहगढ़ साहिब जिले के मुस्तफाबाद गांव के निवासी हैं और एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी रह चुके हैं। वह फतेहगढ़ साहिब के अंतर्गत आने वाली बस्सी पठाना विधानसभा सीट से पहली बार चुनावी मुकाबले में उतरेंगे। अमृतसर में आयोजित एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके नाम का सार्वजनिक ऐलान किया गया। इस विशेष वार्ता में 'वारिस पंजाब दे' के कार्यकारी अध्यक्ष और अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह के साथ-साथ फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

1984 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक कनेक्शन

ज्ञात हो कि 31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सुरक्षाकर्मियों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस पूरे घटनाक्रम की साजिश में केहर सिंह को दोषी करार दिया गया था, जिन्हें 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। पंजाब की राजनीति में इस पंथिक विचारधारा का प्रभाव हाल ही में संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी स्पष्ट रूप से देखा गया था, जब बेअंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह खालसा ने फरीदकोट सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, जेल में बंद होने के बावजूद अमृतपाल सिंह ने भी खडूर साहिब लोकसभा सीट पर शानदार सफलता हासिल की थी। खास बात यह है कि 2024 के आम चुनाव में सतवंत सिंह ने ही सरबजीत सिंह खालसा के समर्थन में चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी।

पार्टी का मुख्य एजेंडा और राजनीतिक रणनीति

इस आगामी चुनाव को लेकर 'वारिस पंजाब दे' के रुख पर बात करते हुए अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने स्पष्ट किया कि संगठन का प्राथमिक उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता हथियाना नहीं है। पार्टी का मुख्य जोर पंथिक सिद्धांतों के संरक्षण, सिख समुदाय की विशिष्ट पहचान और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले परिवारों को उचित सम्मान दिलाना है। उन सियासी चर्चाओं और आलोचनाओं का खंडन करते हुए जिनमें यह कहा जा रहा था कि संगठन पुराने परिवारों से दूर हो रहा है, उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे परिवारों को केवल मौखिक समर्थन नहीं दे रही बल्कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से संगठनात्मक और राजनीतिक जिम्मेदारियां सौंप रही है। आने वाले चुनावों में पार्टी राज्य के क्षेत्रीय मुद्दों, सिख राजनीतिक बंदियों की रिहाई और पंथिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाएगी।