अंबिकापुर| छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अंबिकापुर स्थित संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय परिसर में कथित वित्तीय घोटालों, सुरक्षा गार्डों की तैनाती में फर्जीवाड़े और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे को जाम कर करीब पांच घंटे तक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच तीखी झड़प देखने को मिली, और छात्र कुलपति को मौके पर बुलाने की मांग पर डटे रहे।
कार के सामने लेटे छात्र, पांच घंटे तक चला नेशनल हाईवे पर हंगामा
शुक्रवार शाम लगभग सात बजे जब विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी परिसर से बाहर निकलने लगे, तो आक्रोशित छात्रों ने उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। स्थिति उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब कई छात्र नेता कुलपति की कार के ठीक सामने जमीन पर लेट गए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक फैसलों पर स्पष्ट जवाब मांगा। छात्रों का आरोप था कि वे घंटों धूप और सड़क पर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते रहे, जबकि जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूलित कमरों में आराम फरमाते रहे।
फिनाइल और सफाई सामग्री खरीदी में लाखों के घोटाले का दावा
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय के भीतर हुई विभिन्न खरीदी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फिनाइल और अन्य साफ-सफाई के सामानों की खरीद के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। छात्रों ने मांग की है कि इस पूरे खरीद प्रकरण की एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि इसमें लिप्त दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी और भुगतान में बड़ा फर्जीवाड़ा?
छात्रों ने विश्वविद्यालय में निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती को लेकर भी सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनका दावा है कि कागजी दस्तावेजों में सुरक्षा कर्मियों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर हर साल करीब एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का गबन किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन छात्रों ने अटेंडेंस रजिस्टर, टेंडर और बैंक भुगतानों के दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की मांग उठाई है।
भर्ती प्रक्रिया और पारदार्शीलता पर सवाल
इसके अलावा, विश्वविद्यालय में हाल ही में संपन्न हुई नियुक्तियों को लेकर भी रोष व्यक्त किया गया है। छात्रों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि भर्ती से जुड़े सभी मूल दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
आगे क्या?
पांच घंटे चले इस उग्र आंदोलन और सड़क पर हुए हंगामे के बाद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रबंधन इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस दस्तावेज पेश करता है या छात्रों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में और विकराल रूप धारण करता है।

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