तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी दृष्टि के उपचार के वास्ते देश से बाहर जाने की अनुमति न मिलने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध शीर्ष अदालत का रुख किया है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने उनकी अपील यह कहते हुए अस्वीकार कर दी थी कि वह स्थानीय राजकीय चिकित्सा संस्थान के विशेषज्ञों के पैनल के समक्ष अपनी स्वास्थ्य जांच करवाने से बच रहे थे। अदालत का मत था कि किसी भी चिकित्सीय यात्रा की अनिवार्यता का मूल्यांकन केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर ही संभव है। यह पूरा कानूनी विवाद एक आपराधिक प्रकरण की जांच के दौरान विदेशी दौरों पर लगी पाबंदियों से जुड़ा हुआ है।
अदालत ने क्यों ठुकरायी थी याचिका
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अस्पताल की विशेष मेडिकल समिति के सामने उपस्थित होने के लिए तैयार नहीं थे। इसी आधार पर अदालत ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि जब तक विशेषज्ञ अपनी राय नहीं देते, तब तक विदेश जाने की मांग पर आगे विचार नहीं किया जा सकता।
शीर्ष अदालत में मामला
इससे पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह सांसद के इलाज से जुड़े इस मामले पर एक सप्ताह के भीतर त्वरित सुनवाई करे। सांसद की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने तर्क दिया था कि विदेश में उपचार कराना बेहद आवश्यक है, जिसके चलते यात्रा शर्तों में ढील दी जानी चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी पेच
यह पूरा कानूनी विवाद एक जनसभा के दौरान दिए गए बयानों के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी (एफआईआर) से उपजा है। जांच एजेंसियों के कड़े रुख के बीच अदालत ने पहले अंतरिम सुरक्षा तो प्रदान की थी, लेकिन बिना अनुमति देश छोड़ने पर रोक लगा रखी है। फिलहाल इस मामले पर सर्वोच्च अदालत में अगली कानूनी कार्यवाही जारी है।

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