दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर ईरान की नजर, जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी

तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी हालिया संघर्ष के बीच फारस की खाड़ी के क्षेत्र में शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर ईरान ने 7% शुल्क वसूलने का नया प्रस्ताव रखा है। तेहरान के इस कदम को अमेरिका के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

चीन और रूस को शुल्क से राहत, ओमान कर रहा मध्यस्थता

ईरान की ओर से पेश की गई इस नई व्यवस्था में रणनीतिक सहयोगियों को प्राथमिकता दी गई है:

  • चीन और रूस को छूट: चीन और रूस के व्यापारिक जहाजों को इस प्रस्तावित 7% शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों के बीच एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है।

  • ओमान की मध्यस्थता: क्षेत्रीय पड़ोसी ओमान इस शुल्क को घटाकर लगभग 3% तक सीमित करने और एक सहमति बनाने के लिए बातचीत कर रहा है।

  • अमेरिका का विरोध: अमेरिकी प्रशासन इस जलमार्ग पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने का कड़ा विरोध कर रहा है और इसे पूरी तरह नि:शुल्क रखने पर अड़ा है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव:

  • ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र: विश्व के कुल समुद्री कच्चे तेल (Crude Oil) का लगभग 20% से 25% और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है।

  • लाजिस्टिक्स और महंगाई: जहाजों पर 7% अतिरिक्त प्रभार लागू होने से वैश्विक शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिससे ईंधन और आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।

  • बीमा दरें: क्षेत्र में जारी अस्थिरता के कारण जहाजों के लिए 'वॉर-रिस्क इंश्योरेंस' का प्रीमियम पहले ही उच्च स्तर पर है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहा है।

फिलहाल तेहरान और अन्य हितधारकों के बीच बातचीत जारी है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कोई भी अंतिम समझौता काफी हद तक आगे के कूटनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।