मांगते हैं मुराद, चढ़ाते हैं घंटा…गोंडा के इस मंदिर में मुस्लिम भी टेकते हैं माथा

यूपी के गोंडा का सिद्धपीठ कोल्हमपुर दुर्गा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. जिले ही नहीं, आसपास के कई क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का मानना है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माता के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है. इसी विश्वास के कारण पूरे साल यहां श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है. मंदिर में सुबह और शाम नियमित रूप से माता रानी की आरती होती है. नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस समय दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं. मंदिर का वातावरण भक्तिमय रहता है और पूरा परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंज उठता है. सुबह शाम भक्तों की भारी संख्या में यहां पर भीड़ रहती है.

मंदिर के महंत दीनदयाल वैश्य बताते हैं कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की अनूठी मान्यता है. जिस भी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है वह दोबारा मंदिर आकर माता को घंटा चढ़ाता है. यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. इस मंदिर में मुस्लिम समुदाय के भी लोग दर्शन करने आते हैं. महंत दीनदयाल वैश्य के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे सैकड़ों घंटे इस बात के गवाह हैं कि यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं.

शुभ काम की शुरुआत
महंत दीनदयाल बताते हैं कि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु माता रानी को चुनरी, नारियल, फूल-माला और प्रसाद भी अर्पित करते हैं. कई परिवार किसी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले यहां आकर माता का आशीर्वाद लेते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सिद्धपीठ कोल्हमपुर दुर्गा माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है. यही वजह है कि सालभर यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है और माता के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहता है.