लखनऊ| उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही के दौरान एक बेहद भावुक क्षण देखने को मिला, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में हुए भारी हंगामे और अमर्यादित आचरण को देखकर काफी आहत और भावुक हो गए। मंगलवार को सदन के भीतर हुई घटनाओं पर अपनी गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह अंतिम चरण चल रहा है और अब उन्हें इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि क्या वे वास्तव में इस गरिमामयी पद के योग्य हैं भी या नहीं। उन्होंने दर्दभरे लहजे में कहा कि आज उन्हें पहली बार ऐसा महसूस हुआ है कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कोई कमी रह गई है, या फिर बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की वह बात बिल्कुल सत्य है कि 'संविधान में कोई कमी नहीं होती, बल्कि कमी उसे चलाने वाले व्यक्तियों की सोच में होती है।'
आत्ममंथन करने की जरूरत है: सतीश महाना
विधानसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों से सदन की गरिमा, मर्यादा और स्वस्थ संवाद को बनाए रखने का हरसंभव प्रयास किया है, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद उन्हें आत्ममंथन करने की तीव्र आवश्यकता महसूस हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस बात पर गंभीरता से विचार करेंगे कि उन्होंने अब तक जो कुछ किया, वह उचित था या नहीं और इस संबंध में वे जल्द ही कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
हंगामे के कारण दो बार स्थगित करनी पड़ी सदन की कार्यवाही
यूपी विधानसभा में विपक्षी सदस्यों का हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को पहले आधे घंटे और फिर दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दल के सदस्य राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े चोरी के मामले पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे।
इससे पहले, जैसे ही सुबह 11 बजे दिन की कार्यवाही शुरू हुई, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्षी सदस्यों को संयम बरतने की नसीहत दी थी। हालांकि, जैसे ही प्रश्नकाल (क्वेश्चन आवर) की शुरुआत हुई, सदन में नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को पहले आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा। इसके बाद जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, तो हंगामे के चलते उसे दोपहर एक बजे तक के लिए फिर से स्थगित कर दिया गया।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (SP) पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है जिसने अपने इतिहास में कभी भी लोकतांत्रिक परंपराओं, नियमों या व्यवस्थाओं का सम्मान करना नहीं सीखा है।
डिप्टी सीएम मौर्य ने कहा कि मंगलवार को विधानसभा के अंदर सपा के विधायकों ने जिस प्रकार का अशोभनीय व्यवहार किया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। विपक्षी सदस्यों ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सदन में अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि उनका एकमात्र उद्देश्य केवल सदन का कीमती समय बर्बाद करना है। उन्हें राज्य की जनता के कल्याण और विकास से कोई सरोकार नहीं है।
उन्होंने कड़े शब्दों में आगे कहा कि जो लोग इतिहास में बाबर या बाबरी मस्जिद का पक्ष लेते रहे हैं, उन्हें श्री राम जन्मभूमि से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। चाहे वह मंदिर के चढ़ावे, दान या भव्य निर्माण से जुड़ा कोई भी विषय क्यों न हो। उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी तथा उनका पूरी तरह से सफाया तय है।

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