मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी नवीनतम मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव न करते हुए इसे 5.25 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा है। आरबीआई के इस फैसले से आम जनता, विशेषकर होम लोन और कार लोन के ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि फिलहाल उनकी ईएमआई में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। बाजार विश्लेषकों द्वारा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली इस समीक्षा बैठक में दरें यथावत रखने का पूर्व अनुमान लगाया जा रहा था, जो बिल्कुल सटीक साबित हुआ है।
बाजार के अनुमानों के अनुरूप रही आरबीआई की मौद्रिक नीति
उद्योग जगत के अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विश्लेषकों का पहले से मानना था कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत के स्तर पर बरकरार रखेगा और अपना रुख भी न्यूट्रल बनाए रखेगा। घोषित मौद्रिक नीति पूरी तरह से विशेषज्ञों के अनुमानों के अनुकूल रही है, जहां रेपो रेट और नीतिगत दृष्टिकोण दोनों में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान आने वाले समय में महंगाई के आंकड़ों पर ही केंद्रित रहेगा और भविष्य के फैसले इन्फ्लेशन डेटा के आधार पर तय होंगे।
तीन दिवसीय एमपीसी बैठक में वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था पर मंथन
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी, जिसके विस्तृत नतीजे जारी कर दिए गए हैं। इस मैराथन बैठक के दौरान एमपीसी के सदस्यों ने घरेलू आर्थिक स्थिति के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विशेष रूप से जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) तनावों पर गहन चर्चा की। रिजर्व बैंक का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितताएं अभी भी बरकरार हैं, जिसके चलते सतर्कता बरतनी अनिवार्य है।
चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7 फीसदी किया
नीतिगत दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ आरबीआई ने देश की आर्थिक विकास दर को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.6 फीसदी से संशोधित कर 6.7 फीसदी कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, एसबीआई रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में विकास दर लगभग 7 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है, जो यह दर्शाती है कि यदि अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहता है तो भविष्य में विकास दर के आंकड़ों में और सुधार देखने को मिल सकता है।
महंगाई के रुख पर निर्भर करेगी अक्टूबर की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी
भले ही वर्तमान समीक्षा में ब्याज दरों को नहीं बढ़ाकर राहत दी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी महीनों में महंगाई दर में वृद्धि होती है तो केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। दरें बढ़ने की स्थिति में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की ईएमआई बढ़ जाएगी। फिलहाल लोन ग्राहकों को राहत मिली हुई है और अगर आने वाले समय में मुद्रास्फीति नियंत्रित रहती है तो अक्टूबर में होने वाली अगली समीक्षा बैठक में भी रेपो रेट को यथावत रखा जा सकता है।

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