जयपुर: गुजरात सीमा से सटे राजस्थान के ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिए जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में एक सांसद के सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि यह पवित्र स्थल राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने के योग्य नहीं है और सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
आधुनिक निर्माण कार्यों के चलते पुरातात्विक स्वरूप में बदलाव
सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि सर्वे के दौरान यह बात सामने आई है कि मानगढ़ धाम पर हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण कार्य हुए हैं। इन बदलावों के कारण यह स्थल प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक अवशेष अधिनियम के अंतर्गत तय किए गए मानकों और अपनी मूल प्रमाणिकता को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रख पाया है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है अंग्रेजों द्वारा किया गया भीषण नरसंहार
गौरतलब है कि मानगढ़ धाम को 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' भी कहा जाता है। यहां 13 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्रित हुए आदिवासियों के शांतिपूर्ण सम्मेलन पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसमें पंद्रह सौ से अधिक आदिवासी शहीद हो गए थे। इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण इस स्थल के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए कई कार्य किए गए हैं।
संसद में आए इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति गरमाई
केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में सियासी सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्षी दलों और स्थानीय नेताओं ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों पर आदिवासियों की आस्था के केंद्र की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसका असर आगामी स्थानीय चुनावों पर भी पड़ सकता है।

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