दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, पूछा- शक था तो FIR दर्ज करने से किसने रोका?

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 में चर्चित पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे कानूनी घटनाक्रम और अदालत की कार्यवाही से जुड़े मुख्य पहलुओं को निम्नलिखित चार उप-शीर्षकों के माध्यम से समझा जा सकता है:

एफआईआर दर्ज न करने पर अदालत की आपत्ति

अदालत ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि जब मृतका के पिता ने शुरू से ही मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया था, तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर नियमित आपराधिक जांच क्यों नहीं शुरू की। पीठ ने मामले को केवल आकस्मिक मृत्यु तक सीमित रखने पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चोटों के निशान पर सवाल

हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए आश्चर्य जताया कि इतनी अधिक ऊंचाई से गिरने के बावजूद रिपोर्ट में गंभीर चोटों का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं दिखाई देता है। इस पर दोनों पक्षों की ओर से तस्वीरों की प्रामाणिकता और उनमें कथित हेरफेर को लेकर तीखी दलीलें दी गईं।

दस्तावेज उपलब्ध कराने को लेकर पुलिस को फटकार

अदालत ने याचिकाकर्ता को आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट से जुड़े सामान्य दस्तावेज न देने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब मामला समाप्त हो चुका है और कोई जांच लंबित नहीं है, तो पुलिस को दस्तावेज साझा करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

सीबीआई जांच और राजनीतिक संलिप्तता के आरोप

याचिकाकर्ता पिता ने अपनी याचिका में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने और प्रभावशाली लोगों को बचाने के प्रयासों का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार और पुलिस का रुख अब तक की गई जांच में आत्महत्या की पुष्टि करने पर ही टिका हुआ है।