जयपुर। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) अपने पांचवें चरण में साढ़े नौ हज़ार करोड़ से होने वाले कार्यों पर 84 शहरों में जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, मीडिया एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए कंसल्टेशन मीटिंग्स “आरयूआईडीपी संवाद” का आयोजन करेगा। आरयूआईडीपी संवाद कार्यक्रमों का आयोजन 5 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक 84 शहरों में किया जायेगा जिसमें पंचम चरण में होने वाले कार्यों की जानकारी दी जायेगी तथा साथ ही प्रतिभागियों से सुझाव व फीडबैक लिया जायेगा।
परियोजना निदेशक श्री हरिमोहन मीना ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य अत्यधिक शहरीकृत शहरों एवं उनके सैटेलाइट नगरों का विकास करना है ताकि उनके विस्तार एवं अनियोजित परिधि का प्रबंधन करके, उन्हें रहने योग्य बनाया जा सके जो पर्यावरण के अनुकूल हो और वहाँ स्वस्थ समुदायों का विकास हो सके।
उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख शहरों में अधोसंरचना के अंतराल अथवा कमी को दूर करते हुए सेवा गुणवत्ता में सुधार एवं पर्यावरणीय निरंतरता को बढ़ावा देकर समग्र अपशिष्ट जल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है। अपशिष्ट जल प्रबंधन के कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों में बाढ़ प्रबंधन, ड्रेनेज कार्य, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन तथा कमाण्ड एंड कंट्रोल सेंटर, शहरी गतिशीलता तथा आवश्यकतानुसार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) सम्मिलित हैं।
प्रदेश के 84 शहरों का होगा विकास, शहरों को स्मार्ट व सस्टेनेबल बनाने पर रहेगा फोकस
श्री मीना ने बताया कि राज्य सरकार 84 शहरों में पांचवें चरण के कार्य जल्द ही शुरु करने की तैयारी कर रही है। 9500 करोड़ की लागत से शहरों को स्मार्ट व सस्टेनेबल बनाया जायेगा। इस चरण में अपषिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन, जल निकासी कार्य, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन, कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर आदि क्षेत्रों में प्रदेश के शहरों का विकास किया जायेगा। इस चरण का लाभ अत्यधिक शहरीकरण वाले शहरों और उनके सेटेलाइट शहरों सहित 84 नगरीय निकायों की समस्त शहरी जनता को मिलेगा। राज्य सरकार की बजट घोषणा 2025-26 के अनुरूप आरयूआईडीपी का पंचम चरण प्रक्रियाधीन है जिसके अंतर्गत एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा रूलिप (आरयूएलआईपी) और विश्व बैंक द्वारा 'सूत्र' वित्तपोषित किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा वित्तपोषित परियोजना को ‘राजस्थान अरबन लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेन्ट प्रोजेक्ट‘ (रूलिप) नाम दिया गया है जिसकी लागत 6009 करोड़ रुपये है तथा विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित परियोजना ‘सस्टेनेबल अरबन ट्रांस्फोर्मेशन ऑफ राजस्थान एक्सेलरेटेड’ (सूत्रा) की लागत 3492 करोड़ रुपये है।
परियोजना इस लक्ष्य पर आधारित है कि प्रदेश के शहरों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित तथा स्थायी आधार प्रदान करते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों की पूर्ति में योगदान करने के साथ-साथ सरकार के विकसित भारत-2047 तथा राजस्थान सरकार के विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
इन सेक्टर्स में होगा निवेश
परियोजना निदेशक ने बताया कि राजस्थान के 67 शहरों में एशियन विकास बैंक के वित्तपोषण से अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं शोधित अपषिष्ट जल का पुनः उपयोग किया जाएगा। इसकी लागत 4047 करोड़ होगी।
इसी प्रकार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (32 शहर) के लिए चार अत्यधिक शहरीकृत नगर जयपुर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर और 28 सैटेलाइट शहरों को शामिल किया जाएगा। इन कार्यों की लागत 650 करोड़ रूपये है। इन्हें विश्व बैंक के वित्तपोषण से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शहरी यातायात सुधार के तहत 7 जिला मुख्यालय – जयपुर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर एडीबी द्वारा और बीकानेर, उदयपुर और अजमेर में शहरी परिवहन नेटवर्क में सुधार के लिए शहरी गतिशीलता समाधान लागू किए जाएंगे। इससे शहरी आबादी के लिए कुशल और सतत् परिवहन प्रणाली सुनिश्चित की जा सकेगी। इन कार्यों की लागत 2022 करोड़ रूपये होगी। इन्हें भी विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषण किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज के कार्य 500 करोड़ की लागत से 56 शहरों में किए जाएंगे। कमान्ड एण्ड कन्ट्रोल सेन्टर (ccc) और विरासत संरक्षण एवं पर्यटन संबंधी कार्य भी 56 शहरों में किये जाएंगे। इन कार्यों की लागत 701 करोड़ रूपये है।

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