गाजा में फिर भड़की हिंसा, इजराइल के हवाई हमले में बच्चों समेत 13 की मौत

यरूशलम। गाजा पट्टी के विभिन्‍न इलाकों पर इजराइली सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन भी भीषण हवाई हमले किए गए, जिनमें बेकसूर बच्चों सहित कम से कम 13 नागरिकों की जान चली गई है। फलस्तीनी स्वास्थ्य व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह बमबारी गाजा सिटी, खान यूनिस और दीर अल-बलाह के घने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर की गई। जहां स्थानीय प्रशासन ने इजराइली लड़ाकू विमानों पर नागरिक ठिकानों को तबाह करने का आरोप लगाया है, वहीं इजराइली रक्षा बलों (आईडीएफ) का कहना है कि यह सैन्य अभियान हमास के ढांचागत बुनियादी ठिकानों व सशस्त्र लड़ाकों को समाप्त करने के उद्देश्य से चलाया गया था। इजराइली सेना ने दावा किया कि इस समन्वित हमले में हमास के दो प्रमुख लड़ाके भी मारे गए हैं।

ट्रंप की शांति योजना और निरस्त्रीकरण समझौते के बीच भड़की हिंसा

इजराइल की यह ताजा सैन्य कार्रवाई ऐसे संवेदनशील समय में हुई है, जब हाल ही में हमास ने एक प्रस्तावित निरस्त्रीकरण खाके को अपनी मंजूरी दी थी। इस शांति समझौते के प्रावधानों के अनुसार, हमास को अपने सभी हथियार और सैन्य उपकरण पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' को सौंपने थे। हालांकि, जमीन पर जारी इस भीषण गोलाबारी ने शांति वार्ता और हथियार समर्पण की इस पूरी प्रक्रिया पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

इजराइल का कड़ा रुख और गाजा पट्टी को पूर्ण नियंत्रण में लेने की चेतावनी

इस बीच, इजराइल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने गाजा में किसी भी प्रकार के स्थायी युद्धविराम की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा पट्टी में सैन्य अभियानों को रोकने से जुड़ा कोई भी औपचारिक समझौता अस्तित्व में नहीं आया है। कोहेन ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि हमास पूर्ण रूप से अपने हथियार डालने में विफल रहता है, तो इजराइल के पास संपूर्ण गाजा पट्टी को अपने पूर्ण प्रत्यक्ष नियंत्रण में लेने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा।

गाजा के अधिकांश हिस्से पर इजराइली सेना का बढ़ता दबदबा

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महीनों से जारी निरंतर सैन्य अभियानों के परिणामस्वरूप वर्तमान में गाजा पट्टी के लगभग 70 प्रतिशत भूभाग पर इजराइली सेना का प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हो चुका है। रिहायशी इलाकों पर हो रहे इन हमलों से क्षेत्र में मानवीय संकट और अधिक गहरा गया है, जबकि इजराइल का स्पष्ट रुख यह संकेत देता है कि जब तक हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र में सैन्य दबाव बना रहेगा।