दतिया| मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर चल रहे उपचुनाव की मतगणना के दौरान कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह की शानदार बढ़त को जनता का सीधा और स्पष्ट जनादेश करार दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर चुनाव प्रचार और मतदान के दौरान सत्ता और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद दतिया की जागरूक जनता ने कांग्रेस के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया है।
"पब्लिक सब जानती है"
पीसी शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि, “पब्लिक सब जानती है।” उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के स्वभाव की सराहना करते हुए कहा कि वे एक बेहद सरल और जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं, और जनता ने उनकी इसी सादगी तथा ईमानदारी को स्वीकार किया है। उन्होंने पूरा दावा किया कि जब मतगणना के अंतिम परिणाम सामने आएंगे, तो कांग्रेस पार्टी 10 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से यह चुनाव जीतेगी।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने बातचीत में कहा कि पार्टी को शुरुआत से ही यह उम्मीद थी कि दतिया उपचुनाव में कांग्रेस 25 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज करेगी, लेकिन भाजपा ने समीकरण बिगाड़ने के लिए तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा, उसे फाइनेंस किया और सरकारी तंत्र का जमकर दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, कई मंत्री और भाजपा के तमाम विधायक दतिया में डेरा डाले रहे, लेकिन जनता पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दतिया के मतदाताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस पार्टी और उसकी नीतियों पर अपना पूरा भरोसा जताया है।
जनता के फैसलों को नकारा नहीं जा सकता
इस दौरान उन्होंने हालिया राजनीतिक आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर और भोपाल में हुए विभिन्न प्रदर्शनों ने यह कड़ा संदेश दिया है कि अब देश और प्रदेश की जनता के फैसलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिस तरह नीट पेपर लीक और किसानों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार को झुकना पड़ा, उसी प्रकार दतिया में भी जनता की प्रबल इच्छा यही है कि कुंवर घनश्याम सिंह ही उनके विधायक बनें।
आपको बता दें कि दतिया विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक धोखाधड़ी मामले में दो साल की सजा होने और उसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने के कारण खाली हुई सीट पर कराया जा रहा है। यह उपचुनाव दोनों ही प्रमुख दलों—भाजपा और कांग्रेस—के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई बना हुआ है।

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