नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित आवास की ओर मार्च निकाल रहे भारतीय यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं को नागपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। मेहुल आडवाणी जैसे स्थानीय छात्र व युवा नेताओं के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश भर में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित (E20) पेट्रोल को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले के खिलाफ आम जनता के असंतोष को उजागर करना था। प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस नेता मेहुल आडवाणी ने दोटूक शब्दों में कहा कि आम नागरिकों पर जबरन थोपी जा रही E20 ईंधन नीति का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा और इस फैसले को वापस लेने तक लड़ाई जारी रहेगी।
वाहन मालिकों की चिंता और E20 नीति के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
आंदोलनकारी संगठनों का दावा है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से गाड़ियों के इंजन में गंभीर तकनीकी खराबी आ रही है और इसके कारण माइलेज में भी काफी गिरावट देखने को मिल रही है। विशेष रूप से बीएस-4 और उससे पुराने मानकों वाले वाहनों के लिए इसे बेहद नुकसानदेह बताया जा रहा है। यूथ कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के लिए बाजार में बिना इथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल खरीदने का स्पष्ट विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि लोग अपनी गाड़ियों के अनुसार ईंधन चुन सकें।
ईंधन नीति पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सरकार का रक्षात्मक रुख
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस राष्ट्रीय नीति का मजबूती से बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से विदेशी कच्चे तेल पर देश की निर्भरता घटी है और आयात बिल में अरबों रुपये की बचत हो रही है। इसके साथ ही, इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और इथेनॉल उत्पादन के माध्यम से देश के किसानों को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने E20 ईंधन से गाड़ियों के इंजन खराब होने से जुड़े सभी दावों को पूरी तरह गैर-वैज्ञानिक, बेबुनियाद और भ्रामक करार दिया है।
सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस की कड़ी कार्रवाई
इस घटनाक्रम के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर E20 नीति से जुड़ी अफवाहें और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन व्यक्तियों पर आरोप है कि वे E20 नीति के विषय में झूठी खबरें फैलाकर आम जनता को गुमराह कर रहे थे और केंद्रीय मंत्री को जानबूझकर निशाना बनाने का प्रयास कर रहे थे।

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