नई दिल्ली: देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में रविवार तड़के से लेकर सुबह के समय हल्की तीव्रता के भूगर्भीय झटके दर्ज किए गए हैं। राजधानी दिल्ली, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले और उत्तर-पूर्व के सीमावर्ती इलाकों तक धरती में कंपन महसूस किया गया। राहत की बात यह रही कि इन झटकों के कारण किसी प्रकार के जान-माल की क्षति या अवसंरचनात्मक नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार रविवार को देश के पांच अलग-अलग भौगोलिक केंद्रों पर कम तीव्रता की यह भूगर्भीय घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।
देश के पांच अलग-अलग हिस्सों में दर्ज किए गए कम तीव्रता के झटके
रविवार तड़के सबसे पहली भूगर्भीय हलचल देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र में भोर में लगभग 4:14 बजे दर्ज की गई, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से 8 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इसके पश्चात पूर्वोत्तर राज्य असम के बरपेटा में सुबह 5:25 बजे 2.4 तीव्रता का झटका महसूस हुआ, जबकि अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में सुबह 5:38 बजे 2.8 तीव्रता की हलचल दर्ज की गई। सुबह 9:13 बजे हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाके मंडी में 3.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 8 किलोमीटर गहराई पर था। इसके ठीक बाद पूर्वोत्तर के मणिपुर राज्य स्थित विष्णुपुर क्षेत्र में सुबह 9:34 बजे 3.4 तीव्रता का झटका रिकॉर्ड किया गया, जिसकी गहराई अन्य स्थानों की तुलना में सर्वाधिक 53 किलोमीटर गहराई पर पाई गई।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में संवेदनशीलता और भूगर्भीय जोखिम
हिमाचल प्रदेश का मंडी क्षेत्र भूगर्भीय बनावट के दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार यह संपूर्ण क्षेत्र भारत के भूकंपीय मानचित्र पर अति-संवेदनशील 'जोन-5' श्रेणी के अंतर्गत आता है। इस श्रेणी में शामिल क्षेत्रों में भविष्य में बड़े भूकंपीय दबाव और तेज झटकों की संभावना हमेशा बनी रहती है, जिसके कारण ऐसे पर्वतीय क्षेत्रों में निरंतर सतर्कता और निगरानी बनाए रखी जाती है।
सतह के निकट केंद्र होने के कारण कंपन का वैज्ञानिक विश्लेषण
वैज्ञानिक अध्ययनों और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मानकों के अनुसार भूकंप की उत्पत्ति सतह से लेकर 700 किलोमीटर की गहराई तक किसी भी स्तर पर हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब भूकंपीय हलचल का केंद्र जमीन की ऊपरी सतह के निकट होता है, तो उसकी तरंगों को धरातल तक पहुंचने में कम समय और दूरी लगती है, जिससे झटके अधिक स्पष्ट और तीव्र महसूस होते हैं। रविवार को आए अधिकांश झटकों का केंद्र धरातल से 4 से 8 किलोमीटर की कम गहराई पर केंद्रित था, जिसके कारण स्थानीय निवासियों ने कंपन को स्पष्ट रूप से महसूस किया।

More Stories
एक ही परिवार के चार लोगों समेत पांच की मौत, ट्रक-कार भिड़ंत में मचा हड़कंप
मंदिरों के चढ़ावे पर राजनीति तेज, संजय राउत बोले- ‘राम के नाम पर लूट’
समुद्र में बढ़ी भारत की ताकत, लॉन्च हुआ स्वदेशी DSC A24 युद्धपोत