21 लाख मुआवजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, गर्भवती हत्याकांड में बड़ा निर्णय

सीकर। राजस्थान के सीकर जिले के धोद थाना क्षेत्र स्थित सरवड़ी गांव में गर्भवती महिला प्रियंका कंवर की नृशंस हत्या के मामले में परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार शांत हो गया है। धोद थाने के बाहर करीब 24 घंटे से चल रहा धरना-प्रदर्शन शनिवार को प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संघर्ष समिति के बीच बनी आपसी सहमति के बाद समाप्त हो गया। वार्ता के दौरान पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल देने, केस की त्वरित जांच और आरोपी को सख्त सजा दिलाने जैसे अहम बिंदुओं पर सहमति बनी है।

पड़ोसी ने घर में घुसकर किया था जानलेवा हमला

उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई को सरवड़ी गांव में पड़ोसी युवक ने घर में घुसकर गर्भवती प्रियंका कंवर पर धारदार हथियार से बर्बरतापूर्वक हमला कर दिया था। आरोपी ने उनके गले, हाथ और पैरों पर ताबड़तोड़ वार किए थे। गंभीर हालत में प्रियंका को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां अत्यधिक खून बह जाने के कारण छह माह के अजन्मे शिशु की मौत हो गई। चार दिनों तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद प्रियंका ने भी अंतिम सांस ली। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

24 घंटे चला धरना और प्रशासन संग समझौता

प्रियंका की मौत के बाद जनाक्रोश भड़क उठा और ग्रामीणों ने धोद थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कई दौर की प्रशासनिक वार्ता के बाद समझौते के तहत पीड़ित परिवार को जनसहयोग से 21 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने, विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने तथा एएसपी व डीएसपी के नेतृत्व में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है।

वकीलों की टीम करेगी निशुल्क पैरवी

पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सीकर बार के वरिष्ठ वकीलों की एक विशेष टीम गठित की गई है जो अदालत में निशुल्क पैरवी करेगी। इस कानूनी टीम में क्षेत्र के नामचीन अधिवक्ता शामिल हैं जो आरोपी को कठोरतम सजा दिलाने के लिए केस लड़ेंगे। वहीं स्थानीय प्रशासन भी पात्रता के आधार पर पीड़ित परिवार को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

मासूम बच्चे की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी

दिवंगत प्रियंका के तीन वर्षीय बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। धोद के एक निजी शिक्षण संस्थान के निदेशक ने बालक की पहली से 12वीं तक की पढ़ाई और हॉस्टल का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, जनसहयोग से एकत्र की जा रही 21 लाख रुपये की सहायता राशि को बच्चे के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में जमा कराया जाएगा ताकि उसका भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सके।