जुलाई की बारिश भी नहीं भर पाई कमी, प्रदेश में अब तक 13% कम बरसा पानी

भोपाल| मध्य प्रदेश में जुलाई के महीने में बीच-बीच में लंबे अंतराल के बावजूद ठीकठाक वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन शुरुआती जून महीने में कमजोर मानसून का असर अब भी बारिश के आधिकारिक आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है। पूरे प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम पानी गिरा है। यही मुख्य वजह है कि राज्य के 55 में से 42 जिलों में औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कुछ हद तक कमजोर पड़ रहे हैं, जिसके चलते आगामी चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी व्यापक या भारी बारिश की कोई खास संभावना नहीं है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि अगस्त के महीने में मानसून की बेहतर गतिविधि से बारिश का यह कोटा पूरा हो सकता है।

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर

बीते 48 घंटों के दौरान मालवा-निमाड़ अंचल में मानसून सबसे अधिक सक्रिय नजर आया। खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, धार और रतलाम समेत कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के चलते खंडवा जिले में कपास और मक्का की खड़ी फसलें खेतों में बिछ गईं, जिससे किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। वहीं, बड़वानी जिले के सेंधवा इलाके में उफनते नाले का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे निचले इलाकों में दो फीट तक जलभराव की गंभीर स्थिति बन गई।

इन इलाकों में हुई सबसे अधिक वर्षा

मौसम विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सबसे अधिक बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच दर्ज की गई। इसके अलावा, बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। पूरे प्रदेश के करीब 33 प्रमुख शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई है।

अगस्त में पूरी हो सकती है पानी की कमी

मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच (390.3 मिलीमीटर) बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य स्थिति के अनुसार इस समयावधि तक 17.6 इंच (448.4 मिलीमीटर) वर्षा हो जानी चाहिए थी। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि आने वाले दिनों में अगस्त माह में मानसूनी गतिविधियां फिर से जोर पकड़ती हैं, तो बारिश के इस आंकड़े की भरपाई आसानी से हो जाएगी।