जमीन के नीचे दफन है 2,000 साल पुराना इतिहास! खुदाई में मिले प्राचीन शहर के निशान

रायबरेलीरायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र अंतर्गत ओई भीट गांव में कथित सुरंग मिलने की चर्चाओं के बीच पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक जांच ने इस पूरे मामले को एक नया और ऐतिहासिक मोड़ दे दिया है। विभाग की विशेषज्ञ टीम का स्पष्ट कहना है कि मौके पर किसी भी प्रकार की सुरंग होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, बल्कि जो प्राचीन अवशेष प्रकाश में आए हैं, वे करीब 2000 वर्ष पुराने कुषाणकालीन एक प्राचीन नगरीय संरचना की ओर साफ संकेत करते हैं।

क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा?

करीब एक सप्ताह पूर्व हुई मूसलाधार बारिश के बाद गांव के ही एक किसान सुशील मौर्या के खेत में अचानक एक बड़ा गड्ढा हो गया था। जब सुशील मौके पर मुआयना करने पहुंचे, तो उन्हें गड्ढे के भीतर पक्की ईंटों से बनी हुई प्राचीन दीवार दिखाई दी। इस दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों ने इसे सुरंग मान लिया और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इन खबरों के आधार पर लखनऊ से आई पुरातत्व विभाग की विशेष टीम ने बुधवार को घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने जानकारी दी कि शुरुआती जांच-पड़ताल के दौरान वहां से प्राचीन मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) और अन्य अवशेष मिले हैं, जो लगभग दो हजार साल यानी कुषाणकाल के प्रतीत होते हैं। उन्होंने दोहराया कि ये अवशेष किसी सुरंग का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि मोटी ईंटों से बनी दीवारें और अन्य ढांचागत साक्ष्य एक अत्यंत प्राचीन और विकसित नगरीय बस्ती की मौजूदगी को दर्शाते हैं, जिसकी और गहराई से जांच की जाएगी।

ऐतिहासिक मानचित्र पर उभर सकता है ओई भीट

पुट्रतत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य सरकार मिलकर इस क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से विस्तृत सर्वेक्षण और उत्खनन (खोदाई) कराएं, तो यहाँ एक समृद्ध ऐतिहासिक नगर के महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। जानकारों का कहना है कि इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता की तुलना बिहार के पटना व मधुबनी तथा उत्तर प्रदेश के मथुरा, दिल्ली समेत पंजाब-हरियाणा के प्राचीन पुरातात्विक स्थलों से की जा सकेगी।

ग्रामीणों और खेत मालिक ने की वैज्ञानिक खोदाई की मांग

खेत के मालिक सुशील मौर्या ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि सन 1995-96 और 1996-97 के दौरान भी यहां प्राचीन अवशेष मिलने पर पुरातत्व विभाग ने सर्वे किया था, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण तब यह काम आगे नहीं बढ़ पाया था, जिसका आधिकारिक ब्योरा खसरा नंबर 141 में दर्ज है। इस बार इस नए खुलासे के बाद पूर्व प्रधान, प्रधान प्रतिनिधि हरिश्चंद्र मौर्य, राममिलन, मनोज कुमार सहित तमाम स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि ओई भीट में विधिवत खोदाई कराकर इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाए।