नक्सल मुक्त इलाकों में बदलेगी तस्वीर, सुरक्षा बलों के कैंपों में मिलेंगी आम जनता को सुविधाएं

नई दिल्ली| देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के पूर्ण सफाए के बाद, अब वहाँ स्थापित सुरक्षा बलों के कैंपों में से एक-तिहाई हिस्से को आधुनिक 'जन सुविधा केंद्रों' में परिवर्तित किया जा रहा है। ये केंद्र स्थानीय जनजातीय और ग्रामीण समुदायों को विभिन्न प्रकार की आवश्यक सेवाएँ प्रदान करेंगे, जिनमें आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना, कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक आसान पहुँच, डिजिटल सेवाएँ, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल (हेल्थकेयर) तथा सांस्कृतिक एवं खेलकूद की सुविधाएँ प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस कड़ी में पहला जन सुविधा केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित नेतानार में 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केंद्र' के रूप में स्थापित किया जा चुका है। वर्तमान समय में देश के किसी भी जिले को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी के अंतर्गत नहीं रखा गया है।

देश के 37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' श्रेणी में किया गया शामिल

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, नक्सल-प्रभावित जिलों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी कमी आई है; अप्रैल 2018 में यह संख्या 126 थी, जो घटकर जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 08 और मार्च-अप्रैल 2026 तक घटकर पूरी तरह से 'शून्य' हो गई है। वर्तमान में देश के 37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' जिलों की विशेष श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब प्रत्यक्ष रूप से एलडब्लूई प्रभावित नहीं हैं, परंतु सुरक्षा व्यवस्था और विकासात्मक गतिविधियों की स्थिति को पूरी तरह सुदृढ़ बनाए रखने के लिए यहाँ कुछ और समय तक विशेष सहयोग और निगरानी की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, मात्र एक जिले को 'चिंताजनक जिले' की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ वामपंथी उग्रवाद की हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है तथा उनके संपूर्ण संगठनात्मक ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है। हालाँकि ये क्षेत्र अब उग्रवाद से पूरी तरह मुक्त हैं, फिर भी सुरक्षा निगरानी और विकास कार्यों को निरंतर जारी रखना आवश्यक है ताकि इनके दोबारा सिर उठाने की किसी भी संभावना को पूरी तरह रोका जा सके।

'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के तहत 3805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी

सुरक्षा के मोर्चे को मजबूत करने के लिए भारत सरकार एलडब्लूई प्रभावित रहे राज्यों को निरंतर सहायता प्रदान करती रही है। इसके तहत केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और इंडिया रिजर्व बटालियन (IRB) की तैनाती करती है, हवाई अड्डों और अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा देती है तथा सुरक्षा कैंपों के बुनियादी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ बनाती है। स्थानीय पुलिस बलों को विशेष प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण के लिए भारी फंड, अत्याधुनिक हथियार और उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही खुफिया जानकारियों के सुगम आदान-प्रदान और मजबूत पुलिस थानों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्यों की प्रशासनिक और सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक 'सुरक्षा संबंधी खर्च' (SRE) योजना के माध्यम से कुल 3805.04 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। यह वित्तीय सहायता सुरक्षा बलों के ऑपरेशनल खर्चों, प्रशिक्षण आवश्यकताओं, हथियार डालने वाले (सरेंडर करने वाले) कैडरों के पुनर्वास तथा एलडब्लूई हिंसा में अपनी जान गंवाने वाले सुरक्षा जवानों व नागरिकों के पीड़ित परिवारों को मुआवजा प्रदान करने के लिए उपयोग की गई है।

मुख्यधारा में लौटने वाले कैडरों को हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा

केंद्र और राज्य सरकारों ने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने वाले उग्रवादियों के लिए बेहद व्यापक और आकर्षक पुनर्वास नीतियाँ तैयार की हैं। भारत सरकार 'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के अंतर्गत 'सरेंडर-सह-पुनर्वास' नीति के जरिए राज्यों को पूरी वित्तीय मदद देती है। इस पुनर्वास पैकेज के तहत, उच्च पद या श्रेणी वाले एलडब्लूई कैडर के लिए 5 लाख रुपये तथा अन्य श्रेणी के कैडरों के लिए 2.5 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा, तय नियमों के अनुसार वैध हथियार और गोला-बारूद जमा करने या सरेंडर करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। युवाओं और आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को उनकी पसंद के रोजगार या व्यापार का प्रशिक्षण देने तथा अगले तीन वर्षों तक लगातार हर महीने 10,000 रुपये का वित्तीय वजीफा देने का भी विशेष प्रावधान किया गया है।

देश के विभिन्न क्षेत्रों में 663 आधुनिक पुलिस थानों का निर्माण

राज्य सरकारों द्वारा अपने पुलिस बलों को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने के प्रयासों को 'पुलिस बलों का आधुनिकीकरण' योजना के तहत और अधिक गति दी गई है। इस केंद्रीय योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों को आधुनिक हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उपकरण, उन्नत संचार तंत्र, पुलिस प्रशिक्षण अकादमियों, नए पुलिस स्टेशनों के भवनों, मोबिलिटी साधनों और पुलिस कर्मियों के लिए आवास व अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण हेतु केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इसकी उप-योजना यानी 'विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना' के तहत एलडब्लूई प्रभावित रहे राज्यों में विशेष बलों, खुफिया शाखाओं और जिला पुलिस को मजबूत करने के लिए 1761 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। सुरक्षा के बुनियादी ढाँचे पर विशेष ध्यान देते हुए देश भर में अब तक कुल 663 मजबूत और आधुनिक पुलिस थानों का निर्माण किया जा चुका है।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को मिले 1303.68 करोड़ रुपये

वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन और समन्वय के लिए केंद्रीय एजेंसियों को दी जाने वाली सहायता योजना के तहत सुरक्षा कैंपों के विकास और उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक इस योजना के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को कुल 1303.68 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उग्रवादियों की आर्थिक कमर तोड़ने और प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) तथा उसके गुप्त समर्थकों के बीच के वित्तीय गठजोड़ का पर्दाफाश करने पर विशेष बल दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से राज्य पुलिस द्वारा की गई समन्वित और कड़ी कार्रवाइयों के कारण अतीत में उग्रवादियों को मिलने वाले अवैध फंड और रसद आपूर्ति को रोकने में अभूतपूर्व सफलता मिली है।

दूरदराज के इलाकों में लगाए गए 9,497 नए मोबाइल टावर

सड़क परिवहन और कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों हेतु दो प्रमुख योजनाओं—'रोड रिक्वायरमेंट प्लान' और 'रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट फॉर एलडब्लूई अफेक्टेड एरियाज'—के अंतर्गत कुल 15,189 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य के उन दुर्गम क्षेत्रों में, जो पहले उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित थे, सीमा सड़क संगठन (BRO) के माध्यम से 127.08 किलोमीटर महत्वपूर्ण सड़कों और 06 बड़े पुलों के निर्माण की स्वीकृति भी प्रदान की है। दूरदराज के इन इलाकों में दूरसंचार (टेलीकॉम) सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कुल 9,497 नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) के लिए 47 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और 49 कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 179 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए डाक विभाग ने उग्रवाद मुक्त हुए क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं से लैस 6,025 नए डाकघर खोले हैं, साथ ही इन क्षेत्रों में 1,804 बैंक शाखाएँ और 1,321 एटीएम भी स्थापित किए गए हैं।

लाभार्थियों को बांटे गए 21,26,268 से अधिक स्वामित्व दस्तावेज

क्षेत्रीय विकास को और अधिक गति प्रदान करने के लिए 'स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस' योजना के तहत उन जिलों में सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे की कमियों को दूर करने के लिए विशेष फंड उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2017 में इस योजना की शुरुआत के बाद से अब तक लगभग 4,289.20 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। स्थानीय जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकारों को कानूनी रूप से सुरक्षित करने के लिए लाभार्थियों को कुल 21,26,268 टाइटल डीड़ (स्वामित्व दस्तावेज) वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें 20,20,268 व्यक्तिगत और 1,06,000 सामुदायिक स्वामित्व अधिकार शामिल हैं। स्थानीय स्व-शासन को और अधिक मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत 221.88 करोड़ रुपये जारी

इसके अतिरिक्त, 'सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत भारत सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को उनके ऑपरेशनल क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक कल्याण और जनहित की गतिविधियाँ संचालित करने के लिए विशेष फंड प्रदान करती है। इन कल्याणकारी गतिविधियों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर (मेडिकल कैंप), खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन तथा स्थानीय जरूरतमंद नागरिकों के बीच आवश्यक सामग्री का वितरण शामिल है। इस प्रमुख योजना के माध्यम से वर्ष 2014 से लेकर अब तक कुल 221.88 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इन पहलों ने सुरक्षा बलों और स्थानीय आम जनता के बीच की दूरियों को पाटने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उग्रवाद के पूरी तरह समाप्त होने के बाद अब इन क्षेत्रों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन करने, स्थानीय प्रशासन को सुदृढ़ बनाने, मुख्यधारा में लौटे कैडरों के सुचारू पुनर्वास, आदिवासी संस्कृति व पहचान के संरक्षण तथा दूर-दराज के गाँवों तक शासन की पहुँच सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।