सनातन धर्म में श्रावण यानी सावन मास को भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस वर्ष सावन मास 30 जुलाई, गुरुवार से आरंभ हो रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं. यही कारण है कि सावन का महीना पूरी तरह शिव आराधना को समर्पित माना जाता है. ऐसी स्थिति में अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखते हैं तो भोलेनाथ अति प्रसन्न होते हैं. अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि भगवान शिव को औढ़रदानी और महादानी कहा गया है. भोलेनाथ अपने भक्तों की श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. मनचाहा आशीर्वाद देते हैं, इसलिए सावन में की गई पूजा, जप और तप का अलग महत्व है.
कि यदि सावन मास में कुछ सरल नियमों का नियमित पालन किया जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और यथासंभव सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए, क्योंकि भगवान शिव को श्वेत रंग अत्यंत प्रिय माना गया है. सफेद वस्त्र उपलब्ध न हों तो क्रीम या हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र पहन सकते हैं, जबकि लाल और पीले रंग से परहेज करने की सलाह दी जाती है. स्नान के बाद त्रिपुंड लगाकर निकट के शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरकर उसमें बिना टूटे हुए चावल के दाने डालें. इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करते हुए “ॐ नमः शिवाय, शिवाय नमः ॐ” पंचाक्षर मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें. मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से मन की शुद्धि होती है और शिव कृपा प्राप्त होती है.
पूजा के बाद घर लौटकर अपने पूजन स्थल पर बैठकर महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित दारिद्र्य दहन स्तोत्र का अधिक से अधिक पाठ करें. श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस पाठ से आर्थिक कष्ट दूर होने और घर में सुख-समृद्धि का वास होने की धार्मिक मान्यता है. मनोकामनाओं की पूर्ति, उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप भी अत्यंत फलदायी माना गया है. सावन मास में भगवान शिव की आराधना, संयम, सात्विक आहार और नियमित मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र महीने में सच्चे मन से की गई शिव भक्ति जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है.

More Stories
माउंट आबू की रहस्यमयी पांडव गुफा, जहां आज भी एक साथ होते हैं 5 शिवलिंग के दर्शन
क्या सावन में मकान की नींव रखनी चाहिए, परिवार के लिए शुभ रहेगा या अशुभ?
गुरु पूर्णिमा पर महापर्वों का महासंगम, सत्यनारायण व्रत से लेकर व्यास पूजा तक एक साथ मनाए जाएंगे ये 6 महापर्व