नई दिल्ली। देश में कॉम्पिटिटिव एग्जाम में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर नकेल कसने के लिए संसद में मंथन जारी है। लोकसभा के भीतर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
सत्ता पक्ष का दावा
सरकार की ओर से इस कानून को देश के युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी और ऐतिहासिक कदम बताया गया है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इस सख्त कानून के आ जाने से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी और नकल माफिया पर करारा प्रहार किया जा सकेगा। इससे निष्पक्ष तरीके से तैयारी करने वाले मेधावी छात्रों के अधिकारों की रक्षा होगी।
विपक्ष की तीखी घेराबंदी
दूसरी तरफ, विपक्षी दलों ने इस विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों छात्रों के भविष्य को लेकर रत्ती भर भी गंभीर नहीं है, बल्कि महज दिखावे के लिए ऐसे कानून सामने ला रही है।

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