युद्ध से बातचीत की ओर बढ़े कदम, ईरान ने हमले रोके, सीजफायर पर जोर

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी सीजफायर टूटने के बाद बीते दो हफ़्तों से जारी भारी तनाव के मध्य रविवार (26 जुलाई) को लगातार दूसरे दिन शांति रही। दोनों ही पक्षों की ओर से कोई नया हमला दर्ज नहीं किया गया है। वाशिंगटन ने जहां तेहरान पर अपनी सैन्य कार्रवाई रोक रखी है, वहीं ईरान ने भी फिलहाल कोई पलटवार नहीं करने की बात कही है। इस बीच दोनों देशों को पुनः अंतरिम युद्धविराम समझौते की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो गए हैं।

हमले रुकने का कारण और अमेरिका का रुख

अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तटीय क्षेत्रों व बुनियादी ढांचों पर हमले अचानक रोकने की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सदा कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने चेताया कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) या अमेरिकी सहयोगियों के विरुद्ध आक्रामक कदम उठाता है, तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई सहित सभी विकल्प खुले हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव

ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविजन के माध्यम से पुष्टि की कि बीते दो दिनों में न तो अमेरिका की ओर से कोई कार्रवाई हुई है और न ही ईरान ने कोई जवाबी हमला किया है। इससे पूर्व ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को शरण देने वाले देशों को निशाना बनाया था, जिसमें जॉर्डन स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में तीन लोगों की मृत्यु हो गई थी।

मध्यस्थता की पहल और नौसैनिक नाकाबंदी

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने दोनों देशों के इस रवैये को तनाव घटाने की दिशा में एक 'सकारात्मक संकेत' माना है। वार्ता से जुड़े एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष अंतरिम सीजफायर पर वापस लौटने के इच्छुक हैं और फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर आम सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। ओमान के साथ भी ईरान की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी है, हालांकि अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाई गई उसकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी जारी रहेगी।

ट्रंप और नेतन्याहू की आगामी बैठक

इन घटनाक्रमों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार (28 जुलाई) को वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भेंट करेंगे। नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने और उसे कमज़ोर करने के ट्रंप के प्रयासों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि यह लक्ष्य बिना किसी भीषण युद्ध के प्राप्त होता है तो बेहतर है, परंतु साथ ही चेतावनी भी दी कि इजरायल पर किसी भी सीधे या परोक्ष हमले का करारा जवाब दिया जाएगा।