पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रैपुरा थाने में गत बुधवार 22 जुलाई को हुई एक बेहद सनसनीखेज घटना को लेकर आखिरकार थाना प्रभारी स्मिता सिंह बघेल ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी है और अपनी स्थिति स्पष्ट की है। थाना प्रभारी ने लापरवाही के तमाम आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि थाने की शासकीय बोलेरो कार (क्रमांक MP-03 A-2067) में कोई चाबी नहीं लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि यह वाहन काफी पुराना होने के कारण किसी भी अन्य चाबी से आसानी से स्टार्ट हो जाता है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन थाना प्रभारी स्वयं हत्या के एक गंभीर मामले (धारा 302) के आरोपी को अदालत में पेश करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक आवश्यक बैठक में शामिल होने जिला मुख्यालय पन्ना गई हुई थीं। इसी दौरान ग्राम इमलिया निवासी सुखेंद्र सिंह बुंदेला किसी काम से थाने पहुंचा था। थाना प्रभारी के मुताबिक, वह व्यक्ति एक जमीन विवाद के मामले में आपसी राजीनामा कराने आया था। वहां मौजूद मुंशी अजय मिश्रा ने बातचीत के दौरान पाया कि वह अत्यधिक नशे में धुत था। पूछताछ करने पर उसने खुद शराब पीने की बात स्वीकार की, जिसके बाद मुंशी ने उसे नशा उतरने के बाद दोबारा थाने आने को कहा था।
थाना प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग की यह बोलेरो गाड़ी काफी पुरानी स्थिति में है और इसके इग्निशन में कोई चाबी नहीं लगी थी, क्योंकि यह किसी भी मोटरसाइकिल या अन्य चाबी से स्टार्ट हो जाती है। इसके अलावा वाहन के ड्राइवर साइड का गेट भी ठीक से लॉक नहीं होता है, जिस कारण खिड़की का कांच नीचे गिराकर अंदर से गेट खोलना पड़ता है। शासकीय वाहन की इसी जर्जर स्थिति के कारण वे स्वयं पन्ना जाने के लिए अपने निजी वाहन का उपयोग कर रही थीं।
थाने से गाड़ी लेकर भागा शराबी और हाट बाजार में तांडव
उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई को रैपुरा कस्बे में साप्ताहिक हाट बाजार का दिन था, जिसके चलते बाजार में सैकड़ों लोग खरीदारी करने के लिए मौजूद थे। मुंशी द्वारा थाने से बाहर भगाए जाने के बाद आरोपी सुखेंद्र बुंदेला की नजर थाने के परिसर में खड़ी पुलिस की इसी पुरानी शासकीय कार पर पड़ी। मौका पाकर उसने कार का दरवाजा खोला, उसे स्टार्ट किया और तेज रफ्तार में वाहन को सड़क पर भगा ले गया।
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बाजार में कोहराम: साप्ताहिक हाट बाजार के बीचों-बीच आरोपी ने बेहद तेज और लापरवाही से वाहन चलाते हुए कई राहगीरों को अपनी चपेट में ले लिया।
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कटनी तिराहे के पास उसने एक मोटरसाइकिल (क्रमांक MP-35 MJ-3283) को जोरदार टक्कर मारी, जिससे बाइक सवार दूर जा गिरा और मोटरसाइकिल कार के अगले हिस्से के नीचे फंस गई।
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बेरहम आरोपी फंसी हुई बाइक को करीब 200 मीटर तक सड़क पर घसीटता हुआ चला गया। इसके बाद उसने एक स्कूटी (क्रमांक MP-20 SQ-2276) को भी टक्कर मार दी।
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यह भयानक तांडव तब थमा जब अनियंत्रित कार सड़क किनारे खड़ी 'पांडेय बस' (क्रमांक MP-20 PA-0965) से टकराकर रुक गई। इस जोरदार भिड़ंत में पुलिस की शासकीय बोलेरो भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
थाने में घुसी उग्र भीड़ और घायलों की सूची
घटनास्थल पर मौजूद आक्रोशित लोगों ने आरोपी सुखेंद्र सिंह बुंदेला को अवंतीबाई चौक के पास दबोच लिया और उसे पकड़कर वापस थाने ले आए। इस खौफनाक वारदात से गुस्से में भरी 100 से 150 लोगों की उग्र भीड़ भी पुलिस के पीछे-पीछे थाने के अंदर तक जा पहुंची। गुस्साई भीड़ थाने के एचसीएम (HCM) कक्ष तक घुस गई और आरोपी की पिटाई करने का प्रयास किया। उस समय थाने में मौजूद केवल दो आरक्षकों ने अत्यंत सूझबूझ और कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को उग्र भीड़ के चंगुल से बचाकर सुरक्षित लॉकअप के अंदर बंद किया। करीब दो घंटे तक थाने में चले भारी हंगामे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आश्वासन पर भीड़ शांत हुई।
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घायलों के नाम: इस दर्दनाक हादसे में आधा दर्जन से अधिक आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत रैपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। घायलों में रमेश चौधरी (37), जलसा बाई (36), प्रमोद नायक (55), हेमलता बाल्मीकि (38), बेबी बाई (42), संतोष रैकवार, विमला बाई और काशी प्रसाद लोधी शामिल हैं। इनमें से गंभीर रूप से घायल दो लोगों को परिजनों की विशेष मांग पर बाद में कटनी रेफर कर दिया गया।
पुलिस की कानूनी कार्रवाई और जुलूस
पुलिस ने आरोपी सुखेंद्र सिंह बुंदेला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं—जैसे धारा 303(2) (चोरी), 281 (लापरवाही से वाहन चलाना), 125(ए) (जान-माल को खतरे में डालना व चोट पहुंचाना)—तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है।
साथ ही, पुलिस अभिरक्षा से शासकीय वाहन को ले जाने और सुरक्षा में चूक के इस पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अलग से विभागीय जांच भी शुरू कर दी है। इसके अगले ही दिन यानी शुक्रवार 24 जुलाई को रैपुरा पुलिस ने आरोपी का नगर के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर कड़े पुलिस पहरे के बीच जुलूस भी निकाला।

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