ऑटोइम्यून बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है आंखों और मुंह की ड्राइनेस, जानें बचाव के तरीके

यदि आपकी आंखों में लगातार सूखापन बना रहता है और ऐसा महसूस होता है जैसे हर वक्त कुछ चुभ रहा है, तो यह 'ड्राई आइज' की समस्या का लक्षण हो सकता है। कई मेडिकल रिपोर्ट्स इस बात को लेकर चेतावनी देती रही हैं कि मोबाइल और लैपटॉप पर लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों में नमी की कमी का एक बड़ा कारण बन रहा है।

हालांकि, स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल आंखों के सूखने का मुख्य कारण हो सकता है, लेकिन हर बार यही एकमात्र वजह हो ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार यह स्थिति किसी अंदरूनी और गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करती है।

यदि आंखों के सूखेपन के साथ-साथ मुंह भी बार-बार सूखने लगे, पानी पीने के बावजूद राहत न मिले, खाना निगलने में परेशानी हो या फिर लंबे समय से जोड़ों में दर्द और थकान बनी रहे, तो यह 'स्जोग्रेन सिंड्रोम' (Sjogren's Syndrome) नामक ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 23 जुलाई को 'वर्ल्ड स्जोग्रेन डे' मनाया जाता है।

स्जोग्रेन सिंड्रोम का बढ़ता खतरा

  • विभिन्न मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लाखों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि मरीज लंबे समय तक असल वजह का पता नहीं लगा पाता।

  • यह समस्या आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है, और महिलाओं में इसका खतरा पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।

यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का अपना ही इम्यून सिस्टम गलती से स्वस्थ ग्रंथियों पर हमला करने लगता है। इसका सबसे बुरा असर आंसू बनाने वाली ग्रंथियों और लार बनाने वाली ग्रंथियों पर पड़ता है, जिससे आंखों और मुंह का प्राकृतिक नमी तंत्र प्रभावित होता है। समय के साथ यह समस्या जोड़ों, फेफड़ों, किडनी और तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए, तो इसके लक्षणों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है।