बंद कोयला खदानों के पानी का होगा सदुपयोग, झारखंड में शुरू होगी ‘कोल नीर’ पहल

रांची:झारखंड के कोयला अंचलों में जल संरक्षण और वेस्ट टू वेल्थ की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के पिपरवार क्षेत्र और धनबाद स्थित बीसीसीएल के पुटकी बलिहारी में नवनिर्मित 'कोल नीर' संयंत्रों का भव्य शुभारंभ किया गया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम के जरिए इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विधिवत उद्घाटन किया। इस पहल से खदानों से निकलने वाले अनुपयोगी पानी को शुद्ध करके आम जनता तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

प्रधानमंत्री की 'हर घर जल' अवधारणा को मिलेगी नई मजबूती

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि 'कोल नीर' परियोजना केवल एक पेयजल संयंत्र नहीं है, बल्कि यह नवाचार और 'वेस्ट टू वेल्थ' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद देश के प्रधानमंत्री की 'हर घर जल' की दूरदर्शी अवधारणा और संकल्प को धरातल पर साकार करने का एक अत्यंत सशक्त और व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

खदानों के पानी से जनसेवा और आजीविका के नए साधनों का होगा निर्माण

खदानों से भारी मात्रा में निकलने वाले पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक जो जल व्यर्थ माना जाता था, उसका प्रभावी और सुरक्षित उपयोग किया जा रहा है। इस शोधित जल का उपयोग न केवल जनसामान्य को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में होगा, बल्कि इसे जनकल्याण, क्षेत्र के समग्र विकास और स्थानीय आबादी के लिए आजीविका के नए साधन विकसित करने के एक मुख्य माध्यम के रूप में भी स्थापित किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण के साथ खदान बंदी की समग्र इकोसिस्टम व्यवस्था

सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों में खदानों को बंद करने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए एक समग्र और सुदृढ़ इकोसिस्टम तैयार किया गया है। वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों के अनुसार संचालित की जाने वाली माइन क्लोजर गतिविधियां न केवल पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित होंगी, बल्कि इनमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय सहभागिता को भी पहले से कहीं अधिक मजबूती मिलेगी।

पुनर्वासित क्षेत्रों में विकसित होंगे इको पार्क और सामुदायिक परियोजनाएं

संबोधन के अंतिम चरण में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खनन कार्य समाप्त होने के बाद पुनर्वासित किए गए क्षेत्रों का कायाकल्प किया जा रहा है। इन भू-भागों पर केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि मनोरम इको पार्क, पर्यटन स्थल और अन्य पर्यावरण-अनुकूल सामुदायिक परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह पूरी पहल खदान बंद होने के बावजूद क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगी।