जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। गहलोत ने सार्वजनिक मंच से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधे तौर पर दमन करार दिया। उन्होंने कहा कि अपने हक के लिए आवाज उठा रहे युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ है और देश का जनमानस इस प्रकार के दमनकारी कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग को गहलोत ने बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजधानी के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रख रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय कृत्य है। उन्होंने केंद्र की सत्ता पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि लाठियों और बल प्रयोग के जरिए न तो सत्य को छिपाया जा सकता है और न ही न्याय की गुहार लगा रही जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए खामोश किया जा सकता है।
देश का युवा खुद को ठगा महसूस कर रहा और सड़कों पर उतरने को मजबूर
अपने बयान में युवाओं की बढ़ती नाराजगी को रेखांकित करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज देश का युवा वर्ग पूरी तरह से हताश है और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। अतीत में देश के करोड़ों युवाओं ने बड़े-बड़े वादों और विज्ञापनों पर विश्वास करते हुए वर्तमान सरकार का समर्थन किया था, लेकिन आज वही युवा अपने मौलिक अधिकारों और सुरक्षित भविष्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को हल करने के बजाय युवाओं की जायज मांगों को दबाने का प्रयास कर रही है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की आवश्यकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर जोर
गहलोत ने जोर देकर कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत नागरिकों की आवाज़ को ताकत के बल पर कुचलना लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहार है। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार का यह प्राथमिक दायित्व बनता है कि वह वार्ता व संवाद के माध्यम से समस्याओं का सकारात्मक समाधान निकाले। उन्होंने संविधान का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान और महान लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर संचालित होता है, इसलिए देश को संवैधानिक परंपराओं के अनुरूप ही चलाया जाना चाहिए।

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