सोनम वांगचुक का मुद्दा उठाकर डिंपल यादव का हमला, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ| लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर देश की राजधानी में सियासी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल पहुंचाए जाने की घटना पर विपक्षी दलों ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों और दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है। डिंपल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा करते हुए सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लिया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया।

सांसद डिंपल यादव ने अपने आधिकारिक बयान में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा:

"बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज़ दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।"

दरअसल, यह पूरा हंगामा शनिवार सुबह उस वक्त शुरू हुआ जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के शिविर में भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान पहुंचे। पुलिस प्रशासन ने उनकी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते जंतर-मंतर परिसर में काफी देर तक अराजकता और हंगामे की स्थिति बनी रही।

'ये पुलिस नहीं, आरएसएस के गुंडे हैं'— छात्र नेता अभिजीत दीपके का बड़ा और गंभीर आरोप

सोनम वांगचुक के समर्थन में आंदोलन स्थल पर डटे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है।

अभिजीत दीपके ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा:

  • बर्बरता का दावा: सुबह करीब सात बजे जब मैं नित्यकर्म के लिए धरना स्थल से कुछ दूरी पर गया था, तभी अचानक पुलिसकर्मियों का एक बड़ा दस्ता वहां पहुंचा। उन्होंने अनशन पर बैठे 60 वर्षीय बुजुर्ग सोनम वांगचुक सर के साथ अभद्रता की और उन्हें जमीन पर घसीटते हुए जबरन गाड़ी में लादकर ले गए।

  • परिजनों और समर्थकों से मारपीट: दीपके ने आगे आरोप लगाया कि जैसे ही उन्हें इस बात की भनक लगी और वे वापस जंतर-मंतर की ओर दौड़े, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की।

  • गंभीर आरोप: उन्होंने हताशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे विदेश से उच्च शिक्षा पूरी कर अपने देश वापस लौटे हैं, कोई अपराधी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यह दिल्ली पुलिस नहीं बल्कि एक विशेष संगठन के इशारे पर काम करने वाले लोग हैं जो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर पीट रहे हैं। वर्तमान में वांगचुक को किस वार्ड या गुप्त स्थान पर रखा गया है, इसकी सही जानकारी समर्थकों को नहीं दी जा रही है।

पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर थे वांगचुक

  • आंदोलन का मुख्य कारण: सोनम वांगचुक देश में हाल ही में हुए बड़े पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से अन्न का त्याग कर अनशन पर बैठे थे।

  • स्वास्थ्य में भारी गिरावट: लगातार तीन सप्ताह से भूखे रहने के कारण उनके शरीर के अंगों पर विपरित असर पड़ रहा था। चिकित्सीय रिपोर्ट के अनुसार, अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 9.5 किलोग्राम तक घट चुका था, जिससे डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया था।

दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद प्रशासन ने की चिकित्सीय कार्रवाई

नई दिल्ली: इस पूरे मामले का एक कानूनी पहलू यह भी है कि दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) ने इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लिया था। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए थे कि अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए उनका प्रतिदिन सघन मेडिकल परीक्षण कराया जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच में उनकी स्थिति गंभीर पाई जाती है, तो उन्हें तुरंत जीवन रक्षक चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इसी न्यायिक आदेश का पालन करते हुए शनिवार सुबह डॉक्टरों की सलाह पर वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के विशेष वार्ड में स्थानांतरित किया गया है। बहरहाल, इस कार्रवाई के बाद से राजधानी में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और राजनीतिक बयानबाजी का दौर बेहद तेज हो गया है।