प्रसव के बाद महिला की मौत से बांसवाड़ा में हड़कंप, परिजनों ने उपचार में देरी को बताया वजह

बांसवाड़ा। जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी चिकित्सालय में हाल ही में चार प्रसूताओं की मौत के बाद अब एक और प्रसूता की मौत का अत्यंत दर्दनाक मामला सामने आया है। इस बार मृतका के पीड़ित परिजनों ने गांगड़तलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही बरतने और समय पर उचित उपचार न देने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि हालत लगातार बिगड़ने के बावजूद पीड़िता को समय पर कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी और बांसवाड़ा रैफर किए जाने के दौरान रास्ते में ही प्रसूता ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

सामान्य प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

प्राप्त जानकारी के अनुसार आनंदपुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तेजपुरा गांव की निवासी 23 वर्षीय सरला को गुरुवार शाम करीब छह बजे प्रसव पीड़ा होने के चलते गांगड़तलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। देर रात करीब 12 बजे उसने सामान्य प्रसव के जरिए अपने पहले बच्चे को जन्म दिया, जिससे परिवार में खुशियों का माहौल था। हालांकि, परिजनों के अनुसार प्रसव संपन्न होने के कुछ ही घंटे बाद सरला का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत तेजी से गिरने लगा और उसकी शारीरिक स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई।

ड्यूटी स्टाफ पर सोते रहने का संगीन आरोप

घटना को लेकर मृतका के देवर ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार रात के समय जब सरला की हालत अत्यंत गंभीर हो गई, तो व्याकुल परिजन कई बार वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ को मदद के लिए बुलाने गए, लेकिन उन्हें समय पर कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं दी गई। परिजनों का आरोप है कि रात के वक्त ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी अपने कमरों में सो रहे थे और इलाज में घोर लापरवाही तथा देरी के कारण पूरी रात सरला की हालत बद से बदतर होती चली गई।

रास्ते में तोड़ा दम और नवजात के सिर से उठा साया

परिजनों के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब छह बजे जब प्रसूता की स्थिति नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो गई, तब आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल रैफर किया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और एंबुलेंस से ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया। सरला की शादी करीब एक वर्ष पहले ही हुई थी और इस दुखद हादसे के बाद जहां नवजात शिशु के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है, वहीं पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

परिजनों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

इस हृदय विदारक घटना के बाद मृतका के ससुर और अन्य परिजनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि स्थानीय अस्पताल में समय रहते प्राथमिक उपचार मिल जाता या फिर गंभीर स्थिति को भांपते हुए उसे पहले ही बड़े केंद्र भेज दिया जाता तो सरला को असमय मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता था। पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने और ड्यूटी में कोताही बरतने वाले जिम्मेदार डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।