नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह आसाराम की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति पर पूरी जानकारी लेकर अदालत को अवगत कराए। अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि वह किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना चाहती है ताकि बाद में इस व्यवस्था पर कोई दोष न आए, जिसके बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 21 जुलाई को तय की गई है।
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट और सरकारी हलफनामा
न्यायालय की विशेष पीठ के समक्ष इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि आसाराम को अपनी जीवनशैली में कुछ बुनियादी बदलाव करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस्ट्रो से संबंधित अंदरूनी समस्या के कारण कुछ ब्लीडिंग हुई थी, जो फिलहाल नियंत्रण में है और उनका उचित इलाज किया जा रहा है, इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य सरकार 20 जुलाई तक अदालत में अपना विस्तृत हलफनामा दायर करेगी।
अदालत में दोनों पक्षों की तीखी दलीलें
सुनवाई के दौरान आसाराम के कानूनी पक्ष ने अदालत को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि उनके मुवक्किल की हालत अत्यंत गंभीर है और वे एक हाई-रिस्क श्रेणी के मरीज हैं, इसलिए मानवीय आधार पर उन्हें तुरंत अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। इसके उलट सरकारी वकील ने अदालत के सामने यह भी तथ्य रखा कि कुछ महीने पहले ही आसाराम को धार्मिक यात्राओं पर पैदल चलते हुए देखा गया था, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति उतनी दयनीय नहीं लगती जितनी बताई जा रही है, हालांकि सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार से उनकी सेहत का ताजा ब्यौरा देने को कहा है।
पिछली याचिकाएं और पूर्व की चिकित्सकीय राहत
इस कानूनी प्रक्रिया से ठीक पहले देश की शीर्ष अदालत ने जून के अंत में राजस्थान सरकार से उस याचिका पर भी जवाब तलब किया था, जिसमें राजस्थान उच्च न्यायालय के एक पूर्व फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए यह साफ कर दिया था कि कैदी को जेल में दी जा रही सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं निरंतर जारी रहनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने यह विशेष छूट भी दी थी कि यदि आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ता है, तो इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए कोर्ट के समक्ष पेश किया जा सकता है।
आजीवन कारावास का पुराना कानूनी मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2013 में दर्ज हुए एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटना से जुड़ा हुआ है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने विगत मई महीने में निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा था, जिसमें आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय ने मानव तस्करी, आपराधिक धमकी और पॉक्सो अधिनियम सहित कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत दी गई सजा को पूरी तरह सही माना था, जिसके कारण वे लंबे समय से जेल की सजा काट रहे हैं और अब स्वास्थ्य को आधार बनाकर बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं।

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