पिकैक्स माउंटेन बना चुनौती, ईरान के इस गढ़ को तबाह नहीं कर पा रहा अमेरिका

वाशिंगटन / तेहरान: ईरान के साथ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रडार पर अब एक नया और बेहद गोपनीय ठिकाना आ गया है, जिसे सैन्य गलियारों में ‘पिकैक्स माउंटेन’ कहा जा रहा है। ईरान के इस बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड ठिकाने को ध्वस्त करने के लिए अमेरिकी प्रशासन पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस विशेष लोकेशन पर अमेरिका के सबसे आधुनिक और घातक बंकर-बस्टर बम भी बेअसर साबित हो रहे हैं। ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति के पीछे वाशिंगटन का दशकों पुराना वह वॉर एजेंडा है, जिसके तहत अमेरिका हर कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूत करना चाहता है।

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के इस अगले बड़े टारगेट का खुलकर एलान किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका बहुत जल्द पिकैक्स माउंटेन पर एक बड़ा शॉट लगाने जा रहा है और उन्होंने ईरानियों को इसके लिए तैयार रहने को कहा है। ट्रंप ने दावा किया कि वाशिंगटन इस न्यूक्लियर ठिकाने पर बहुत पैनी नजर रखे हुए है और जैसे ही किसी परमाणु गतिविधि की भनक लगती है, उसे निशाना बनाया जाता है। यही वजह है कि अब ईरान इस विषय पर बात करने से भी कतरा रहा है।

जाग्रोस पहाड़ियों में छिपा 'कुह-ए कोलंग गज़ ला'

ईरानी भाषा में इस रहस्यमयी जगह को ‘कुह-ए कोलंग गज़ ला’ कहा जाता है, लेकिन अमेरिकी सेना ने अपनी रणनीतिक सहूलियत के लिए इसे ‘पिकैक्स माउंटेन’ नाम दिया है। यह गुप्त ठिकाना ईरान की विशाल और दुर्गम जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के बीच बेहद चतुराई से छिपाया गया है। रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नया अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स ईरान के मुख्य नतांज न्यूक्लियर प्लांट से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

तबाही के मलबे से निकला नया परमाणु किला

विगत समय में अमेरिकी वायुसेना ने अपने शक्तिशाली ‘बंकर-बस्टर’ बमों से नतांज प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाया था। नतांज के आंशिक रूप से प्रभावित होने के बावजूद, उसके ठीक बगल में मौजूद इस पिकैक्स माउंटेन के भीतर ईरान का परमाणु प्रोजेक्ट बिना रुके लगातार चलता रहा। साल 2020 से ही ईरान इस पहाड़ के नीचे बड़ी-बड़ी सुरंगों और गुप्त कमरों की खुदाई में जुटा है। शुरुआत में ईरान ने दावा किया था कि वह यहां सिर्फ एक नया सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट बना रहा है, क्योंकि उसका पुराना प्लांट नष्ट हो चुका था। लेकिन अब इस सुरंग के विशाल आकार और क्षमता को देखकर रक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

अमेरिकी महाबमों की पहुंच से दूर महासुरंग

रक्षा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिकैक्स माउंटेन के नीचे बना यह सुरंगों का जाल इतना गहरा और कंक्रीट से मजबूत किया गया है कि इस पर अमेरिका के सबसे आधुनिक पारंपरिक विनाशकारी बमों का भी कोई असर नहीं होगा। यही अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी चिंता है। इस ठिकाने के अंडरग्राउंड चैंबर्स जमीन से करीब 260 से 330 फीट की गहराई पर बनाए गए हैं। यह गहराई ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘फोर्डो’ न्यूक्लियर प्लांट से भी कहीं ज्यादा है, जो इसे मौजूदा अमेरिकी मिसाइलों की मारक क्षमता से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला सुरक्षा का घेरा

हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से साफ हुआ है कि ईरान ने इस पूरे पहाड़ी इलाके के चारों तरफ भारी सुरक्षा दीवारें खड़ी कर दी हैं। इसके साथ ही सुरंग के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट से अभेद्य बनाया जा रहा है, पहाड़ काटकर निकाली गई ताजा मिट्टी के ढेर और भारी कंस्ट्रक्शन मशीनें दिन-रात वहां काम करती दिख रही हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन तस्वीरों से यह पूरी तरह साबित होता है कि ईरान किसी भी संभावित हवाई या मिसाइल हमले से अपनी संवेदनशील परमाणु मशीनों और रिएक्टर पार्ट्स को बचाने के लिए उन्हें जमीन के काफी नीचे शिफ्ट कर चुका है।