इंदौर: जिले के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में दूषित भोजन करने से बच्चों के अस्वस्थ होने की गंभीर घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देशों और कलेक्टर शिवम वर्मा के सीधे मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीमें जिले के तमाम शैक्षणिक संस्थानों के भोजनालयों और कैंटीनों की सघन चेकिंग कर रही हैं। इसी कड़ी में खाद्य सुरक्षा विभाग के दल ने बायपास मार्ग स्थित झलारिया में संचालित शिशुकुंज एजुकेशनल सोसायटी की मेस का औचक निरीक्षण किया। इस जांच के दौरान भोजन बनाने और परोसने की व्यवस्था में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं, जिसके बाद प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 का इस्तेमाल करते हुए संस्थान को कारण बताओ और सुधार का नोटिस थमा दिया है।
जांच में सामने आईं बेहद गंभीर लापरवाही और खामियां
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई इस औचक कार्रवाई के दौरान परिसर में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं पाई गईं। रसोईघर की खिड़कियां खुली थीं, जहां कीड़े-मकोड़े रोकने की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे भोजन दूषित होने का सीधा खतरा बना हुआ था। साथ ही, कच्ची खाद्य सामग्री के रखरखाव में घोर लापरवाही देखी गई और भंडारण कक्ष में एक्सपायर्ड (अंतिम तिथि पार कर चुकी) सामग्री भी जमा मिली, जो कि खाद्य सुरक्षा के बुनियादी नियमों का सीधा उल्लंघन है। रसोई में उपयोग होने वाले पानी की शुद्धता को लेकर कोई भी प्रमाणित लैब टेस्ट रिपोर्ट मौजूद नहीं थी और कीटनाशक नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) का ब्योरा भी अधूरा पाया गया। हद तो तब हो गई जब भोजन बनाने के लिए स्वास्थ्य के अनुकूल बर्तनों के बजाय एल्युमिनियम के बर्तनों का इस्तेमाल होता मिला और गहरे फ्रीजरों में तापमान मापने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
प्रयोग किया हुआ तेल और मानकों के विपरीत मिले खाद्य पदार्थ
निरीक्षण के दौरान रसोई में पहले से इस्तेमाल किया जा चुका हानिकारक कुकिंग ऑयल भी बरामद हुआ, जिसे दोबारा उपयोग के लिए रखा गया था। इसके अतिरिक्त, बच्चों को परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए पूर्व में लिए गए 23 नमूनों की रिपोर्ट जब सामने आई, तो उसने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। इन नमूनों में से पांच महत्वपूर्ण चीजें—जिनमें पीने का पानी, सोयाबीन तेल, ब्रियो नमकीन, तुअर दाल और अमूल स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम शामिल हैं, प्रयोगशाला की जांच में पूरी तरह फेल साबित हुईं और मानकों के विपरीत पाई गईं। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विभाग ने संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रशासन ने दिया 14 दिन का अल्टीमेटम, रद्द हो सकता है लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने इस पूरे मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन को चेतावनी जारी की है। संस्थान को इस अव्यवस्था और कमियों को ठीक करने के लिए केवल 14 दिनों का समय दिया गया है। तय समय सीमा के भीतर सभी मानकों को दुरुस्त कर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि दिए गए समय में संतोषजनक सुधार नहीं किया गया, तो प्रशासन स्कूल की मेस का लाइसेंस निलंबित करने के साथ-साथ अन्य कठोर कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

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