अयोध्या: पावन नगरी अयोध्या के सबसे सुरक्षित और प्रतिष्ठित राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की धनराशि और आभूषणों की चोरी से जुड़े बेहद संवेदनशील मामले में कानून व्यवस्था ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस प्रशासन बुधवार की सुबह इस मामले के मुख्य आरोपियों—रमाशंकर मिश्रा और मंदिर के चढ़ावा गणना प्रभारी रहे सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को कड़े सुरक्षा घेरे के बीच जिला कारागार (जेल) से अपनी हिरासत में लेकर रवाना हो गई है।
अदालत द्वारा मंजूर की गई 14 घंटे की कस्टडी रिमांड की अवधि बुधवार सुबह से प्रभावी हो गई है। पुलिस की एक विशेष टीम सुबह करीब 8:10 बजे जिला जेल परिसर पहुंची, जहां जेल मैनुअल के तहत जरूरी लिखापढ़ी और सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद दोनों आरोपियों को अपनी अभिरक्षा (कस्टडी) में ले लिया गया। इस बड़े घटनाक्रम के बाद से पूरे क्षेत्र के प्रशासनिक हलकों में हलचल काफी तेज हो गई है।
पुलिस लाइन अस्पताल में कराया गया मेडिकल परीक्षण; गोपनीय ठिकाने पर शुरू हुई कड़े चक्रव्यूह में गहन पूछताछ
अयोध्या: जिला जेल से दोनों आरोपियों को सीधे पुलिस के अभेद्य सुरक्षा घेरे में बाहर लाया गया और आगामी कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया:
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स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया: जेल से निकालने के बाद पुलिस टीम रमाशंकर और सुभाष श्रीवास्तव को लेकर सबसे पहले पुलिस लाइन परिसर स्थित शासकीय अस्पताल पहुंची। यहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा दोनों आरोपियों का विस्तृत डॉक्टरी मुलाहिजा (मेडिकल परीक्षण) कराया गया, ताकि कस्टडी के दौरान उनकी सेहत का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज रहे।
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रणनीतिक ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी: मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद विवेचक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम ने दोनों को पुलिस लाइन के भीतर बने एक गोपनीय विमर्श कक्ष में ले जाकर आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के आला अफसरों का कहना है कि 14 घंटे की इस सीमित रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से जो भी सुराग मिलेंगे, उनके आधार पर मंदिर की संपत्ति को छुपाकर रखने वाले उनके संभावित ठिकानों और मददगारों के घरों पर तुरंत दबिश और छापेमारी की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुलिस लाइन के मुख्य प्रवेश द्वार पर अतिरिक्त सशस्त्र पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
अब तक लाखों की नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और दो लग्जरी कारें जब्त; रमाशंकर के पास मिले थे 7 लाख रुपये
अयोध्या: राम मंदिर की सुरक्षा और मर्यादा से जुड़े इस बड़े मामले में पुलिस की विवेचना टीम अब तक कई चौंकाने वाले खुलासे कर चुकी है और रिकवरी में बड़ी सफलता हासिल की है:
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चार आरोपियों से उगलवाए राज: कस्टडी रिमांड के इस सिलसिले में पुलिस इस गिरोह में शामिल चार अन्य सह-आरोपियों को पहले ही रिमांड पर लेकर उनसे कड़ाई से पूछताछ कर चुकी है। उन आरोपियों के बयानों और निशानदेही के आधार पर पुलिस ने चोरी की गई भारी मात्रा में नगदी, बेशकीमती आभूषण और वारदात में इस्तेमाल की गई दो चार पहिया (लग्जरी) गाड़ियों को बरामद कर अपने कब्जे में ले लिया है।
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गणना प्रभारी के रिकॉर्ड की पड़ताल: इस पूरे मामले में रमाशंकर मिश्रा के पास से शुरुआती तफ्तीश के दौरान ही लगभग सात लाख रुपये की चोरी की रकम बरामद कर ली गई थी। वहीं दूसरी तरफ, मंदिर के चढ़ावे की गिनती की देखरेख करने वाले मुख्य गणना प्रभारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के पास से अब तक सीधे तौर पर कोई नकदी हाथ नहीं लगी है। यही कारण है कि पुलिस इन 14 घंटों में सुभाष श्रीवास्तव के सामने रमाशंकर को बिठाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर गणना प्रभारी की नाक के नीचे से इतनी बड़ी चोरी को अंजाम कैसे दिया गया और क्या इसमें कोई आंतरिक मिलीभगत थी।
पुलिस ने मांगी थी पूरे 7 दिनों की लंबी रिमांड; अदालत ने सिर्फ 14 घंटे की कस्टडी को दी हरी झंडी
अयोध्या: इस हाई-प्रोफाइल चोरी कांड की तह तक जाने और पूरे अंतरराष्ट्रीय या अंतर्प्रांतीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने अदालत के सामने बड़ी मांग रखी थी:
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7 दिन की कस्टडी की थी दरकार: मामले के मुख्य विवेचक आशुतोष तिवारी ने साक्ष्यों को पूरी तरह संकलित करने और गायब आभूषणों की शत-प्रतिशत बरामदगी के लिए सक्षम न्यायालय से दोनों मुख्य आरोपियों की पूरे 7 दिनों (168 घंटे) की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर करने की गुहार लगाई थी।
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अदालत का फैसला: माननीय कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को बेहद बारीकी से सुनने के बाद पुलिस की 7 दिन की मांग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल 14 घंटे की कस्टडी रिमांड को ही हरी झंडी दी। समय बेहद कम होने के कारण पुलिस बिना एक भी मिनट गंवाए दोनों आरोपियों से एक-एक पल का हिसाब मांग रही है, ताकि रिमांड की अवधि समाप्त होने और उन्हें वापस न्यायिक हिरासत में जेल भेजने से पहले मंदिर के चढ़ावे की एक-एक पाई का सच जनता और अदालत के सामने लाया जा सके।

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