नई दिल्ली: भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए दोनों पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। शीर्ष अदालत ने इस विषय को अत्यधिक संवेदनशील बताते हुए कहा कि वह मामले की गंभीरता को समझते हुए इसकी नियमित रूप से सुनवाई करने और समाधान तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रहा है, जिसमें धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था।
बयानबाजी और शब्दों के चयन पर कोर्ट की नसीहत
मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को भाषा की मर्यादा बनाए रखने की सख्त हिदायत दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल होने वाले हर एक शब्द को बहुत सोच-समझकर चुना जाना चाहिए ताकि समाज में किसी भी तरह का गलत संदेश न जाए।
अनावश्यक विवादों से बचने की अपील
पीठ ने अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अदालत के भीतर या बाहर कही गई कोई भी बात अनावश्यक विवादों को जन्म दे सकती है। इसी वजह से न्यायपालिका और इससे जुड़े सभी पक्षों को अपनी दलीलों और बयानों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है ताकि सौहार्दपूर्ण माहौल प्रभावित न हो।

More Stories
3 महीने के मासूम की सर्जरी में चौंकाने वाला खुलासा, पेट से निकला ‘जुड़वां बच्चा’
घर में घुसकर बेअदबी केस के आरोपी की हत्या, फतेहगढ़ साहिब में हड़कंप
होर्मुज हमले पर भारत सख्त, भारतीय की मौत के बाद ईरानी राजनयिकों को बुलाया