चलती पैसेंजर ट्रेन से उतारी गई शराब की खेप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के दावों के बीच राजधानी पटना के ग्रामीण इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। यहाँ फतुहा-बंकाघाट रेलखंड पर स्थित पुनपुन रेलवे पुल के समीप एक पैसेंजर ट्रेन को रोककर उसमें से शराब की एक बड़ी खेप को बेखौफ अंदाज में उतारे जाने का सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। हालांकि, संबंधित विभाग द्वारा अभी इस वीडियो की आधिकारिक सत्यता की पुष्टि की जानी बाकी है, लेकिन इस घटना ने रेल पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

सूनसान पुल पर पहले से घात लगाकर बैठे थे अवैध शराब तस्कर

सूत्रों से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना सोमवार की शाम घटित हुई जब पुनपुन रेलवे पुल के पास असामाजिक तत्वों और तस्करों का एक बड़ा गिरोह पहले से ही मुस्तैद था। बताया जा रहा है कि तस्करों को ट्रेन के आने और वहां उसकी गति धीमी होने की सटीक समय सारणी पहले से ही मालूम थी। जैसे ही पैसेंजर ट्रेन पुल के पास आकर बेहद धीमी हुई या रुकी, वैसे ही वहां घात लगाए बैठे करीब आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध युवक फुर्ती से ट्रेन की बोगियों के पास पहुंच गए और भारी-भरकम बोरियों को नीचे उतारने के काम में जुट गए।

ट्रेन की बोगियों और अंडरकैरेज के गुप्त हिस्सों से निकाली गईं बोरियां

इंटरनेट पर वायरल हुए इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि तस्कर बेहद शातिराना तरीके से ट्रेन की बोगी के अंदरूनी हिस्सों और नीचे बने लोहे के केबिन (अंडरकैरेज) में छिपाई गई बोरियों को एक-एक कर बाहर निकाल रहे हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का पुरजोर दावा है कि इन सभी बोरियों में भारी मात्रा में विदेशी और देसी शराब की बोतलें भरी हुई थीं, जिन्हें तस्करी के उद्देश्य से यहाँ लाया गया था। वीडियो में सबसे चौंकाने वाली बात यह नजर आती है कि इस पूरी गैर-कानूनी गतिविधि के दौरान वहां दूर-दूर तक उन्हें टोकने या रोकने वाला कोई भी जिम्मेदार रेलकर्मी या सुरक्षा बल का जवान मौजूद नहीं था।

यात्री द्वारा बनाए गए मोबाइल वीडियो से हुआ मामले का भंडाफोड़

अवैध शराब की इस बड़ी री-लोडिंग और तस्करी का भंडाफोड़ तब हुआ जब उसी ट्रेन में सफर कर रहे एक सजग यात्री या किसी स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए पूरी वारदात को अपने मोबाइल फोन के कैमरे में चुपके से कैद कर लिया। घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुआ, वैसे ही यह आग की तरह फैल गया और इसके बाद सूबे में कानून-व्यवस्था तथा ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई। सामान को सुरक्षित उतारने के बाद सभी तस्कर बिना किसी डर के माल सहित मौके से नौ दो ग्यारह होने में कामयाब रहे।

चेहरे धुंधले होने के कारण रेल पुलिस ने शुरू की उन्नत तकनीकी जांच

मामले के तूल पकड़ते ही रेल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। फतुहा रेल थाना प्रभारी राजेश कुमार ने इस संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आ चुका है और उसकी हर पहलू से बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, वीडियो में दिख रहे संदिग्ध लोगों के चेहरे और हुलिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण वीडियो फुटेज को उन्नत तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के लिए साइबर सेल के पास भेजा गया है, ताकि डिजिटल माध्यम से तस्करों की सटीक पहचान सुनिश्चित कर उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा सके।