भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में सरकारी स्कॉलरशिप योजना में सेंधमारी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने करीब 99.48 लाख रुपये की छात्रवृत्ति राशि के गबन को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। इस वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के तत्कालीन बैंक अधिकारियों, भोपाल के एक निजी मैनेजमेंट कॉलेज के प्रबंधकों और कुछ अन्य लोगों समेत कुल छह आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर एमबीए के छात्रों के नाम का दुरुपयोग किया और उनकी सहमति के बिना बैंक खाते खुलवाकर सरकार से मिलने वाली सहायता राशि को अवैध रूप से हड़प लिया।
बिना जानकारी के खोले गए सैकड़ों बैंक खाते
जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने धोखाधड़ी का एक बेहद शातिर नेटवर्क तैयार किया था। कॉलेज प्रबंधन ने बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके कुल 118 ऐसे बैंक खाते खोल दिए, जिनकी जानकारी संबंधित विद्यार्थियों को थी ही नहीं। इन फर्जी खातों में उन छात्रों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने न तो कभी छात्रवृत्ति के लिए कोई आवेदन दिया था और न ही कभी उक्त बैंक शाखा में अपना खाता खुलवाने की प्रक्रिया पूरी की थी। इन खातों को पूरी तरह से आरोपियों द्वारा ही नियंत्रित किया जा रहा था ताकि राशि का आसानी से गबन किया जा सके।
महामारी के दौर में अंजाम दिया गया पूरा खेल
इस पूरे वित्तीय हेरफेर की समय सीमा को देखें तो यह खेल मुख्य रूप से जनवरी 2020 से लेकर अक्टूबर 2021 के बीच खेला गया। इसी अवधि में आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से कागजी हेरफेर किया और सरकारी खजाने से जारी होने वाली स्कॉलरशिप की राशि को इन नए खुले बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिया। जैसे ही छात्रवृत्ति की राशि खातों में जमा होती, आरोपी तुरंत एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और ओटीपी सुविधाओं का इस्तेमाल कर पूरी रकम बाहर निकाल लेते थे।
बैंक की सतर्कता से बेनकाब हुआ गिरोह
इस बड़े घोटाले की कलई तब खुली जब यूको बैंक के भोपाल स्थित जोनल ऑफिस को हबीबगंज शाखा के कुछ विशिष्ट खातों में होने वाले संदिग्ध लेन-देन की भनक लगी। बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को जब नियमित ऑडिट के दौरान इन खातों के संचालन और पैसों की निकासी के तरीकों पर गहरा संदेह हुआ, तो उन्होंने इस गड़बड़ी पर तुरंत एक्शन लिया। बैंक प्रबंधन की तरफ से इस संबंध में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर सीबीआई ने इस मामले की प्रारंभिक जांच अपने हाथ में ली।
सीबीआई की पड़ताल में सामने आए पुख्ता सबूत
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की टीम ने बैंक के दस्तावेजों, खाता खोलने के फॉर्म्स, केवाईसी पेपर्स और स्कॉलरशिप भुगतान से जुड़े तमाम डिजिटल एवं भौतिक रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में लेकर उनकी गहन पड़ताल शुरू कर दी। जांच के दौरान यह साफ हो गया कि खाता खोलने की प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थीं और जरूरी वेरिफिकेशन नहीं किया गया था। अब सीबीआई दर्ज एफआईआर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।

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