गयाजी में सीएम सम्राट चौधरी का बयान, बोले- विधायक जनता की आवाज बनकर करें काम

गया। पवित्र नगरी गयाजी में आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रबोधन कार्यक्रम के भव्य उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नवनिर्वाचित और वर्तमान विधायकों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी संदेश दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्रिय, सजग और जवाबदेह बनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सदन केवल हाजिरी लगाने की जगह नहीं है, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं को मुखरित करने का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक माध्यम है। विधायक जितने जनहित के मुद्दे उठाएंगे, शासन को जमीनी हकीकत समझने में उतनी ही सुगमता होगी।

प्रश्नकाल और शून्यकाल को जन-आकांक्षाओं का मजबूत हथियार बनाएं

संसदीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक को सदन की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसे महत्वपूर्ण अवसरों का भरपूर और प्रभावी इस्तेमाल करना चाहिए। ये ऐसे विशेष माध्यम हैं जो सीधे तौर पर जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को शासन के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का काम करते हैं। जब जनप्रतिनिधि पूरी जिम्मेदारी के साथ इन सत्रों का उपयोग करते हैं, तो प्रशासनिक अमला भी जनहित के कार्यों के प्रति अधिक संवेदनशील और तत्पर दिखाई देता है।

पूरी तैयारी, तथ्यात्मक अध्ययन और विधायी नियमों के साथ सदन में रखें पक्ष

एक सफल और असरदार जनप्रतिनिधि की परिभाषा बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चुनाव जीत जाना किसी भी राजनेता की सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकता। सदन की गरिमा को बढ़ाने के लिए विधायकों को विभिन्न विधेयकों, बजटीय कटौती प्रस्तावों और संसदीय कार्यप्रणाली के नियमों का गहन और गंभीर अध्ययन करना चाहिए। जब कोई सदस्य पूरी तैयारी और ठोस तथ्यों के साथ सदन के पटल पर अपनी बात रखता है, तो न केवल उसकी व्यक्तिगत छवि निखरती है बल्कि वह अपनी जनता की बात को भी अधिक मजबूती से मनवाने में सफल रहता है।

वरिष्ठ नेताओं के दीर्घकालिक विधायी अनुभवों से सीखें संसदीय बारीकियां

सदन के वरिष्ठतम सदस्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नए विधायकों को एक विशेष सलाह दी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और सदन के अन्य कद्दावर नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि दशकों से लगातार जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले इन वरिष्ठ राजनेताओं का अनुभव नए सदस्यों के लिए एक चलती-फिरती पाठशाला की तरह है। नए विधायकों को चाहिए कि वे इन अनुभवी नेताओं के आचरण, उनकी भाषण शैली और विधायी प्रक्रियाओं की समझ को करीब से देखें और सीखें ताकि वे अपनी लोकतांत्रिक भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।

गरीबों, युवाओं और महिलाओं का भरोसा जीतना ही लोकतंत्र की वास्तविक सेवा

संबोधन के समापन के दौरान उन्होंने सभी उपस्थित सदस्यों का आह्वान किया कि वे लगातार आत्ममंथन करें कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विश्वास व्यवस्था में कैसे अटूट बनाया जा सकता है। युवाओं को रोजगार के अवसर दिलाना, महिलाओं का सशक्तिकरण करना और गरीब परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करना ही एक सच्चे सेवक का परम कर्तव्य है। उन्होंने सभी से जनसेवा की भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की ताकि देश का लोकतंत्र धरातल पर और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा कल्याणकारी सिद्ध हो सके।