सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद बड़ा निर्णय, CJI ने कार्रवाई से किया इनकार; जानें कारण

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हुई एक अप्रत्याशित घटना पर शीर्ष अदालत ने अत्यंत संयमित रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही न करने का निर्णय लिया है। जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एक वादी ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि अदालत में फाइलें भी उछाल दीं। इस घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत हिरासत में लेकर बाहर निकाल दिया था। सीजेआई ने भी रजिस्ट्रार को इस मामले में आगे कोई कानूनी कदम न उठाने के निर्देश दिए हैं।

सस्ती लोकप्रियता और अदालती गरिमा का प्रश्न

न्यायालय का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को अक्सर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के इरादे से अंजाम दिया जाता है। यदि ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर या अन्य कठोर कदम उठाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति अपने ऐसे ही निहित स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों में सफल हो सकता है। रजिस्ट्रार द्वारा मामले की सूचना मुख्य न्यायाधीश को दिए जाने पर उन्होंने इसे नजरअंदाज करने और कोई कानूनी कार्यवाही न करने का निर्देश दिया, ताकि न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक व्यवधान से बचाया जा सके।

अदालत में याचिकाकर्ता का दुस्साहस

घटनाक्रम के अनुसार, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता, जो स्वयं अपना पक्ष रख रहा था, ने अत्यधिक आक्रामक रुख अपना लिया। उसने स्वयं को 'संप्रभु' घोषित करते हुए लखनऊ के एक एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अजीबोगरीब आदेश सुनाया। जब पीठ ने इस पर आपत्ति जताई और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल किया, तो याचिकाकर्ता आपा खो बैठा। उसने अदालत के भीतर गाली-गलौज की और अपनी केस फाइल के पन्ने हवा में उछाल दिए, जिससे वहां उपस्थित सभी लोग स्तब्ध रह गए।

न्यायिक संयम और भविष्य के संकेत

यह घटना भले ही न्यायिक मर्यादा के विरुद्ध थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का इसे तूल न देने का निर्णय दर्शाता है कि न्यायपालिका ऐसे असामाजिक व्यवहारों को बहुत गंभीरता से नहीं लेती जो केवल ध्यान खींचने के लिए किए जाते हैं। सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई ने अदालत की कार्यवाही को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद की। इस मामले में कोई कठोर कानूनी कार्रवाई न करना यह संदेश देता है कि अदालतें अपनी कार्यप्रणाली की गरिमा को बनाए रखने के प्रति पूरी तरह सचेत हैं और ऐसी तुच्छ हरकतों को न्यायिक समय की बर्बादी मानती हैं।