फिरोजाबाद। जिले के शिकोहाबाद क्षेत्र की यादव कॉलोनी में बीती 30 मई 2026 की दोपहर डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक (निवासी बदायूं) को शुक्रवार को मृत्युदंड की सजा दी गई है। इसके साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस खौफनाक वारदात के महज 41वें दिन जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।
अभियुक्त विराज उर्फ जितेंद्र पाठक (निवासी शेखूपुर, सिविल लाइंस, बदायूं) को न्यायलय ने बृहस्पतिवार को ही हत्या का दोषी ठहरा दिया था। शुक्रवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस उसे कारागार से अदालत परिसर लेकर पहुंची। दोपहर करीब पौने तीन बजे जैसे ही जज ने उसे फांसी की सजा सुनाई, दोषी विराज अदालत कक्ष में ही रोने लगा। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाहियां पूरी तरह अकाट्य हैं।
न्यायालय ने इस घटना को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' और अत्यंत क्रूर श्रेणी का माना, जिसमें अपराधी को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। फैसला आने के बाद पुलिस ने उसे दोबारा हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। कोर्ट परिसर में मौजूद मृतक बच्चे की नानी पिंकी देवी ने इस न्याय पर संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की।
पारिवारिक अनबन का फायदा उठाकर रची थी खौफनाक साजिश
मूल रूप से अरांव के गांव बामई की रहने वाली रति शर्मा का विवाह फरवरी 2024 में बदायूं के सुमित कुमार से हुआ था। वैवाहिक जीवन में अनबन के चलते रति जनवरी 2026 से अपने मायके में रह रही थी। 30 मई को वह अपने पति पर कानूनी कदम उठाने की सलाह लेने के लिए अपनी मां पिंकी देवी के साथ शिकोहाबाद के एक वकील से मिलने आई थी। अधिवक्ता ने उन्हें शाम पांच बजे का समय दिया था, जिसके कारण वह अपनी मुंहबोली मौसी के घर यादव कॉलोनी चली गई।
वहां सुमित का फुफेरा भाई विराज उर्फ जितेंद्र पाठक पहुंच गया और रति को अपनी बातों में उलझाने लगा। विराज ने रति के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे रति ने तुरंत खारिज कर दिया। इस इनकार से बौखलाए विराज ने एक खौफनाक साजिश रची। वह रति के डेढ़ साल के बेटे आरव को बहला-फुसलाकर टॉफी दिलाने के बहाने बाहर ले गया। घर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर एक सुनसान रास्ते पर ले जाकर, इस दरिंदे ने रति से प्रतिशोध लेने के लिए मासूम आरव को महज 27 सेकंड के भीतर आठ बार पक्की सड़क पर बेरहमी से पटका, जिससे बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
सीसीटीवी फुटेज और पुलिस मुठभेड़ से खुला मामला
इस रूह कंपा देने वाली वारदात का पूरा दृश्य वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था, जो अदालत में सबसे पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य बना। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी बच्चे के शव को घर के मुख्य द्वार पर फेंककर फरार हो गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात के कुछ ही घंटों बाद रात को एक मुठभेड़ के दौरान आरोपी को दबोच लिया था। इस जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने से आरोपी घायल भी हुआ था।
मासूम को समझता था अपने रास्ते की रुकावट
दोषी विराज के सिर पर रति को पाने की सनक सवार थी। उसे लगता था कि रति उससे शादी करने के लिए केवल अपने डेढ़ साल के बेटे आरव के कारण तैयार नहीं हो रही है। इसी पागलपन में उसने मासूम को अपने रास्ते से हटाने का क्रूर फैसला कर लिया।
वारदात से लेकर मृत्युदंड तक का पूरा घटनाक्रम
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30 मई (दोपहर 2:30 बजे): आरोपी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज ने मासूम आरव की बेरहमी से हत्या की।
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30 मई (रात): शिकोहाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया।
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31 मई: शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार किया गया।
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4 जून: पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
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15 से 21 जून: मामले से जुड़े सभी 13 गवाहों के बयान दर्ज हुए।
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3 जुलाई: सभी न्यायिक साक्ष्य पूरे किए गए।
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6 जुलाई: दोनों पक्षों की अंतिम जिरह समाप्त हुई।
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9 जुलाई: अदालत ने आरोपी विराज को हत्या का दोषी करार दिया।
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10 जुलाई: न्यायालय द्वारा दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई।

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